अंतर्राष्ट्रीय: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग को लेकर एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी AI कंपनी एन्थ्रोपिक की 154 पन्नों की थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में ईरान समर्थित हूथी समूह से जुड़े एक हथियार इंजीनियरिंग नेटवर्क ने कंपनी के AI मॉडल ‘क्लाउड’ (Claude) का इस्तेमाल मिसाइलों के गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल (GNC) सॉफ्टवेयर तैयार करने में किया।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी यमन में सक्रिय एक टीम तीन प्रमुख मिसाइल कार्यक्रमों पर काम कर रही थी। इनमें गाइडेड रॉकेट, 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी की मल्टीस्टेज बैलिस्टिक मिसाइल और ‘R2000’ नामक प्रोग्राम शामिल था, जिसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल जैसी तकनीक पर काम किया जा रहा था।
एन्थ्रोपिक के मुताबिक, AI का इस्तेमाल कोड लिखने, सॉफ्टवेयर में बदलाव और उसकी समीक्षा, कंट्रोल सेटिंग्स को ट्यून करने, फर्मवेयर बिल्ड और फ्लाइट सिमुलेशन जैसे तकनीकी कार्यों में किया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ऑपरेटरों ने अलग-अलग AI इंस्टेंस का इस्तेमाल अलग-अलग कामों के लिए किया, ताकि कोडिंग, रिसर्च और समीक्षा को अलग रखा जा सके।
कंपनी ने कहा कि उसके सुरक्षा सिस्टम ने कई संदिग्ध अनुरोधों को रोक दिया, लेकिन सभी प्रयासों को रोकना संभव नहीं हुआ। कथित तौर पर एक्टर्स ने अपने उद्देश्य और सॉफ्टवेयर के वास्तविक इस्तेमाल को छिपाने तथा काम को कई सत्रों में बांटने जैसे तरीके अपनाए।
एन्थ्रोपिक ने कहा कि एक गाइडेड रॉकेट का टेस्ट-फायर कथित तौर पर असफल रहा और इसके कुछ घंटों बाद संबंधित लोग समस्या को ठीक करने के लिए फिर AI की मदद लेने लगे। हालांकि, कंपनी के पास इस बात का सबूत नहीं है कि इन लोगों ने सफलतापूर्वक कोई ऑपरेशनल गाइडेड हथियार तैनात किया था। जांच के बाद कंपनी ने संबंधित अकाउंट्स पर रोक लगाई और जानकारी सुरक्षा साझेदारों के साथ साझा की।
रिपोर्ट में पारंपरिक हथियारों के अलावा AI के संभावित दुरुपयोग के अन्य मामलों का भी उल्लेख है। एन्थ्रोपिक ने साइबर ऑपरेशन, निगरानी, प्रोपेगैंडा और संभावित जैविक हथियार संबंधी रिसर्च से जुड़े कई मामलों की पहचान की है। कंपनी के अनुसार, ये मामले आम नहीं हैं, लेकिन तेजी से सक्षम हो रहे AI सिस्टम के गलत इस्तेमाल की संभावित दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।








