अंतर्राष्ट्रीय: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले राजधानी नई दिल्ली में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बहुप्रतीक्षित मुलाकात शनिवार को होगी।
भारत मंडपम में शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी दोपहर 3:30 बजे राष्ट्रपति पुतिन और शाम 6:15 बजे राष्ट्रपति पेजेशकियन से मुलाकात करेंगे। इसके बाद शाम 6:45 बजे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित है।
मोदी-पुतिन बैठक को रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारत-रूस संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लगातार युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहा है। वहीं, पेजेशकियन के साथ बैठक पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम होगी।
सबसे अधिक नजर शनिवार को मोदी और शी जिनपिंग की बैठक पर रहेगी। यह बैठक भारत-चीन संबंधों में हाल के सुधार के प्रयासों के बीच हो रही है। वर्ष 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के संबंधों में खटास आई थी। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विस्तारित BRICS में अब 11 सदस्य देश हैं—भारत, ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया। भारत BRICS को पश्चिम-विरोधी मंच के बजाय विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के बीच सहयोग बढ़ाने के मंच के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई अन्य देशों के नेताओं के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इनमें इथियोपिया, मलेशिया, यूएई, वियतनाम, कजाकिस्तान, फिलीपींस, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका के नेता शामिल हैं।
नई दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग रणनीतिक हितों वाले देशों के नेताओं की मौजूदगी BRICS सम्मेलन के बढ़ते कूटनीतिक महत्व को रेखांकित करती है। भारत इस मंच के जरिए आर्थिक सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।








