मुंबई: अपनी सुरीली आवाज और मधुर संगीत से हिंदी और बंगाली सिनेमा को समृद्ध करने वाले महान संगीतकार एवं पार्श्व गायक हेमंत कुमार मुखोपाध्याय को उनके प्रशंसक आज भी ‘हेमंत दा’ के नाम से याद करते हैं। उनके गाए और संगीतबद्ध किए गीत आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हैं।
बनारस में जन्मे हेमंत कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता में हासिल की। उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन संगीत के प्रति बढ़ते रुझान के कारण इसे बीच में ही छोड़ दिया। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा शैलेश दत्त गुप्ता से ली और उस्ताद फैयाज खान से शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
हेमंत कुमार ने आकाशवाणी से बंगाली गीतों के जरिए अपने गायन करियर की शुरुआत की। बाद में उन्होंने कोलंबिया और ग्रामोफोनिक कंपनी ऑफ इंडिया के लिए गैर-फिल्मी गीत रिकॉर्ड किए। हिंदी फिल्मों में भी उन्हें पार्श्वगायक के रूप में अवसर मिला और धीरे-धीरे उनकी पहचान स्थापित होती गई।
बंगाली फिल्मों में संगीतकार के रूप में सफलता हासिल करने के बाद वह मुंबई आए। फिल्म ‘आनंद मठ’ से हिंदी सिनेमा में संगीतकार के रूप में उन्हें व्यापक पहचान मिली। फिल्म में लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया ‘वंदे मातरम’ आज भी बेहद लोकप्रिय है।
इसके बाद ‘नागिन’ ने उनके संगीत करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म का गीत ‘मन डोले मेरा तन डोले’ लंबे समय तक श्रोताओं की पसंद बना रहा। इस फिल्म के लिए हेमंत कुमार को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
उन्होंने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया और कई हिंदी तथा बंगाली फिल्मों का निर्माण किया। ‘बीस साल बाद’, ‘कोहरा’, ‘बीबी और मकान’, ‘फरार’, ‘राहगीर’ और ‘खामोशी’ जैसी फिल्मों से उनका जुड़ाव रहा।
संगीत और सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले हेमंत कुमार का निधन 1989 में हुआ। उनकी आवाज, संगीत और यादगार गीत आज भी भारतीय संगीत जगत की अमूल्य विरासत हैं।







