पटना: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में चिकित्सकों की विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों में कथित फर्जीवाड़े के मामले ने एक बार फिर कानूनी मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट के विरोध में मामले के शिकायतकर्ता सत्येंद्र कुमार ने विशेष अदालत में प्रतिवाद पत्र दाखिल किया है।
पटना स्थित सीबीआई की विशेष न्यायिक दंडाधिकारी महविश फातिमा की अदालत में शिकायतकर्ता की ओर से यह प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने प्रतिवाद पत्र पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। अदालत ने एजेंसी की मांग स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
इस मामले की शिकायत पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि एम्स पटना में चिकित्सकों के विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों में फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि उच्च पदों पर बैठे कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों की कथित तौर पर अनुचित तरीके से नियुक्तियां करवाईं।
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की और इसके आधार पर नियमित मामला संख्या 24 ए 2025 दर्ज किया था। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज कर नियुक्तियों से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की थी। ये धाराएं धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित हैं।
जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसके बाद अदालत ने शिकायतकर्ता को सम्मन जारी कर क्लोजर रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था।
अब शिकायतकर्ता की ओर से प्रतिवाद पत्र दाखिल किए जाने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी। अगली तारीख पर सीबीआई को अपना जवाब प्रस्तुत करना है। अदालत में होने वाली इस सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि क्लोजर रिपोर्ट पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।







