कुरुक्षेत्र: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हरियाणा वीरों और देवों की भूमि है। इसी पवित्र धरती से श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचा। देश की आजादी की लड़ाई में भी हरियाणा के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने साहस, त्याग तथा समर्पण से इतिहास में विशेष स्थान बनाया।
राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रही थीं। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हरियाणा की महिलाओं के योगदान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान रेवाड़ी की महज 12 वर्षीय एक बालिका ने नमक कानून तोड़कर आंदोलन में भाग लिया था और अपनी पूरी बचत देश के लिए समर्पित कर दी थी। राष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा की धरती ने हमेशा साहसी और वीर व्यक्तित्वों को जन्म दिया है।
खेलों के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने निशानेबाज मनु भाकर, मुक्केबाज स्वीटी बूरा और जैस्मिन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन से देश का गौरव बढ़ाया है। इसके साथ ही उन्होंने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में हरियाणा के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।
इससे पहले राष्ट्रपति ने शक्तिपीठ देवीकूप भद्रकाली मंदिर में पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष भी मौजूद रहे।
इसके बाद राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने हरियाणा के 60 वर्षों के इतिहास, विकास और उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में वर्ष 2047 तक विकसित हरियाणा के निर्माण की परिकल्पना को भी प्रदर्शित किया गया। समारोह की शुरुआत वंदे मातरम के साथ हुई। इस अवसर पर प्रदेश की विकास यात्रा पर आधारित वीडियो दिखाई गई और राष्ट्रपति ने रत्नावली महोत्सव के पोस्टर का विमोचन किया।
अपने कार्यक्रम के अगले चरण में राष्ट्रपति गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचीं। यहां वह स्वामी श्रद्धानंद के 100वें बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।







