पोलैंड में संवैधानिक संकट गहराया, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आमने-सामने
Constitutional crisis deepens in Poland; President and Prime Minister at odds

वारसॉ: पोलैंड में संवैधानिक न्यायाधिकरण की संरचना और न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने देश के नाम टेलीविजन संबोधन में स्पष्ट किया कि इस संकट में कानून के शासन की जीत होगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा, दबाव और राजनीतिक हितों के बजाय संविधान और कानून सर्वोपरि होने चाहिए।

इस विवाद ने प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और राष्ट्रपति कारोल नावरोत्स्की के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। हालात उस समय गंभीर हो गए, जब राष्ट्रपति ने नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर जारी गतिरोध के बीच संवैधानिक न्यायाधिकरण की इमारत में प्रवेश करने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस ने परिसर को घेर लिया। घटना का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण हुआ, जिसके बाद पोलैंड का संवैधानिक संकट यूरोप में भी चर्चा का विषय बन गया।

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प्रधानमंत्री टस्क ने इस घटनाक्रम को निंदनीय बताते हुए कहा कि देश में शांति बहाल करने का मतलब अराजकता या हिंसा को स्वीकार करना नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश की मजबूती इस बात में है कि वह कानून लागू करने और न्याय सुनिश्चित करने में सक्षम हो।

दरअसल, पोलैंड में संवैधानिक न्यायाधिकरण को लेकर विवाद वर्ष 2015 से चला आ रहा है। उस समय सत्तारूढ़ सिविक प्लेटफॉर्म और विपक्षी लॉ एंड जस्टिस (पीआईएस) पार्टी के बीच न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर टकराव शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह विवाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायाधिकरण की संरचना से जुड़ा बड़ा राजनीतिक संकट बन गया।

टस्क के मुताबिक, संसद के निचले सदन सेज्म ने नए न्यायाधीशों का चयन किया और उन्होंने पद की शपथ भी ले ली। इसके बावजूद राष्ट्रपति नावरोत्स्की ने उनकी शपथ को औपचारिक मान्यता नहीं दी। वहीं, न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बोगदान श्विएंत्कोव्स्की ने भी नए न्यायाधीशों को कार्यभार संभालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

प्रधानमंत्री ने नवनिर्वाचित न्यायाधीशों को कानूनी रूप से नियुक्त बताते हुए कहा कि किसी भी राजनेता को न्यायाधीशों को निर्देश देने या डराने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पीआईएस और धुर दक्षिणपंथी कॉन्फेडरेशन पार्टी से जुड़े नेताओं की भी आलोचना की।

टस्क ने इस राजनीतिक संकट में रूस समर्थक समूहों की संभावित भूमिका को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन सक्रिय रूसी बॉट इस विवाद का फायदा उठाकर संवैधानिक व्यवस्था के विरोधियों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार संवैधानिक न्यायाधिकरण की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। हालांकि, राष्ट्रपति के साथ विवाद सुलझाने के लिए उन्होंने कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया।