लूला की जीत पर एमए बेबी ने दी बधाई, लोकतांत्रिक आंदोलनों को बताया प्रेरणादायक
MA Baby congratulates Lula on his victory, describes democratic movements as inspiring

नयी दिल्ली: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एमए बेबी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला द सिल्वा को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है। उन्होंने इस चुनावी जीत को श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए संघर्ष करने वाली लोकतांत्रिक एवं प्रगतिशील ताकतों के लिए प्रेरणादायक बताया।

प्रगतिशील ताकतों की एकजुटता पर जोर

एमए बेबी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में लूला और ब्राजील की जनता को बधाई दी। उन्होंने वर्कर्स पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ ब्राजील और लूला के समर्थन में अभियान चलाने वाली अन्य लोकतांत्रिक एवं प्रगतिशील ताकतों की सराहना की।

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माकपा महासचिव ने कहा कि लूला के चुनाव अभियान ने यह संदेश दिया है कि जनता की एकजुटता के जरिए नफरत और विभाजन की राजनीति का मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने ब्राजील के चुनावी जनादेश को उन लोकतांत्रिक ताकतों के लिए महत्वपूर्ण बताया, जो राजनीतिक ध्रुवीकरण और विभाजनकारी अभियानों का सामना कर रही हैं।

लोकतंत्र और सामाजिक अधिकारों की रक्षा का संदेश

बेबी के अनुसार, यह जीत लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा, सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को बनाए रखने और जनकल्याण को मजबूत करने के प्रयासों को प्रोत्साहित कर सकती है। उन्होंने ब्राजील के लोकतांत्रिक संघर्ष में युवाओं की भूमिका का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलनों में युवाओं की भागीदारी भारत की युवा पीढ़ी को भी प्रेरित कर सकती है। बेबी ने दोनों देशों के लोकतांत्रिक आंदोलनों के बीच समानताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ब्राजील में युवाओं का उत्साह भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे युवाओं में नई ऊर्जा भर सकता है।

ब्राजील की राजनीतिक संप्रभुता पर जोर

एमए बेबी ने ब्राजील की जनता के स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश की राजनीतिक दिशा तय करने का अधिकार वहां की जनता के पास है। उन्होंने ब्राजील को किसी अन्य देश के प्रभाव में चलने वाला राष्ट्र मानने की धारणा को खारिज किया।

उनके संदेश में श्रमिक अधिकारों, आर्थिक समानता, सामाजिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता पर जोर दिया गया। उन्होंने लूला की जीत को उन आंदोलनों के लिए प्रोत्साहन के रूप में प्रस्तुत किया, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक अधिकारों की रक्षा की वकालत करते हैं।