ओम बिरला की BRICS देशों के नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता
Om Birla’s bilateral talks with leaders of BRICS nations

नयी दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के सम्मेलन में शामिल होने आए रूस, क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से द्विपक्षीय मुलाकात की। इन बैठकों में संसदीय सहयोग मजबूत करने, आर्थिक संबंधों का विस्तार करने, व्यापार को बढ़ावा देने और आतंकवाद जैसी साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर चर्चा हुई।

भारत-रूस संसदीय संबंधों पर जोर

रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के साथ बैठक में ओम बिरला ने भारत और रूस की विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दोनों देशों की संसदों के बीच संवाद बढ़ाने, संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित आदान-प्रदान और युवा एवं महिला सांसदों के बीच संपर्क मजबूत करने का सुझाव दिया।

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बिरला ने भारतीय भाषाओं में संसदीय कार्यवाही को सुलभ बनाने के लिए ‘संसद भाषिणी’ के उपयोग का भी उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि और उद्योग के क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विचार किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन के लिए रूस की सराहना की।

क्यूबा के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग

क्यूबा की नेशनल असेंबली ऑफ पीपुल्स पावर और काउंसिल ऑफ स्टेट की उपाध्यक्ष एना मारिया मारी माचाडो के साथ बैठक में संसदीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं और औषधि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। बिरला ने वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स की भूमिका को रेखांकित किया।

मिस्र और बेलारूस के साथ साझेदारी

मिस्र के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख सामेह शौकरी के साथ बातचीत में दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। औषधि, रसायन और उद्योग के क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। बिरला ने पहलगाम आतंकवादी हमले की मिस्र द्वारा निंदा किए जाने की सराहना की और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया।

वहीं, बेलारूस की प्रतिनिधि सभा के उपाध्यक्ष वादिम इपातोव के साथ बैठक में संसदीय प्रक्रियाओं, विधायी अनुभवों के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और बैंकिंग संपर्क मजबूत करने पर विचार हुआ।

ओम बिरला ने कहा कि ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज और साझा प्राथमिकताओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।