राहुल गांधी की अपील, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली
Rahul Gandhi’s appeal: ‘Save the Vote, Save the Nation’ mega-rally to be held at Ramlila Maidan on November 1st

नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और लोकतंत्र पर कथित हमले के विरोध में लोगों से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ जन मार्च और महारैली में शामिल होने की अपील की है।

राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर मतदाताओं के नाम हटाए गए, नियम-कानूनों का उल्लंघन हुआ और सवाल उठाने वालों पर लाठियां चलाई गईं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

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छात्रों, किसानों और युवाओं से शामिल होने की अपील

कांग्रेस नेता ने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित लोकतंत्र की चिंता करने वाले सभी लोगों से एक नवंबर को रामलीला मैदान पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने मताधिकार के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “वोट आपका है। लड़ाई भी आपकी है।”

राहुल गांधी की इस अपील को मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस के राजनीतिक अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी इस रैली के माध्यम से मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मताधिकार से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाना चाहती है।

भाजपा पर भी कसा तंज

राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि वे भी एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली का जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए भाजपा और उसके सहयोगियों को धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि अगले सात दिनों तक भी भाजपा और उसके सहयोगी इसी उत्साह और लगन के साथ रैली का प्रचार जारी रखें।

एक नवंबर को जुटेंगे कांग्रेस समर्थक

दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ जन मार्च और महारैली के जरिए कांग्रेस मतदाता अधिकारों और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में है। राहुल गांधी ने विभिन्न सामाजिक वर्गों से इसमें भागीदारी करने की अपील की है।

रैली के दौरान मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण, कथित तौर पर नाम हटाए जाने और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहने की संभावना है।