प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में दशहरा का पर्व हर्षोल्लास और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। मीरापुर के काकरहा घाट पर आयोजित रामलीला के दौरान 20 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। भगवान श्रीराम के प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाते ही रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा। इस दृश्य के साथ ही पूरा लीला स्थल जय श्रीराम के जयकारों से गूंजने लगा।
रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु आयोजन स्थल पर पहुंचे थे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही रावण के पुतले में आग लगी, उपस्थित लोगों ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
इससे पहले करेली रामलीला कमेटी की ओर से भगवान श्रीराम की सवारी निकाली गई। यह सवारी शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए काकरहा घाट स्थित रामलीला स्थल तक पहुंची। सवारी के पहुंचने के बाद रावण वध की लीला का मंचन किया गया।
कार्यक्रम देखने के लिए दर्शक कई घंटे पहले से ही जुटने लगे थे। रावण वध की लीला को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई थी। मैदान में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम की विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश प्रस्तुत किया गया।
रावण दहन दशहरा पर्व का प्रमुख आकर्षण रहा। पुतले के जलते ही मैदान में मौजूद लोगों ने उत्साह के साथ जय श्रीराम के नारे लगाए। धार्मिक आयोजन में शामिल लोगों ने इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा।
दशहरा का पर्व लोगों को सत्य, मर्यादा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रयागराज में आयोजित इस कार्यक्रम ने रामलीला की परंपरा और धार्मिक आस्था को जीवंत किया। स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पर्व की खुशियां साझा कीं।







