स्टारलिंक समेत सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों की मंजूरी 90 दिन में देने का सुझाव
Proposal to grant approval to satellite internet companies, including Starlink, within 90 days.

चंडीगढ़। पंजाब सरकार के पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने केंद्र सरकार से स्टारलिंक समेत सभी लाइसेंसधारक उपग्रह ब्रॉडबैंड कंपनियों की मंजूरी प्रक्रिया निश्चित समयसीमा में पूरी करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को नीतिगत दस्तावेज सौंपते हुए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और सभी कंपनियों के लिए समान नियम लागू करने का सुझाव दिया है।

‘स्टारलिंक एंड इंडिया: ए पॉलिसी फ्रेमवर्क’ शीर्षक वाले दस्तावेज में सिद्धू ने सिफारिश की है कि विभिन्न विभागों की मंजूरियों और सुरक्षा संबंधी आकलन को समानांतर रूप से पूरा करने के लिए सचिवों की एक समिति गठित की जाए। उन्होंने स्टारलिंक, यूटेलस वनवेब और जियो-एसईएस जैसी कंपनियों के मामलों का निपटारा 90 दिनों जैसी घोषित समयसीमा में करने का प्रस्ताव रखा है।

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सुरक्षा शर्तों और निगरानी पर जोर

सिद्धू के अनुसार, भारत के सामने विकल्प केवल स्टारलिंक को अनुमति देने या रोकने का नहीं, बल्कि स्पष्ट भारतीय शर्तों के तहत मंजूरी देने और निर्णय को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने के बीच है। उन्होंने दूरसंचार विभाग की सुरक्षा शर्तों को आधार बनाकर अतिरिक्त प्रावधान लागू करने का सुझाव दिया है।

इनमें भारत में सरकारी निर्देशों को सर्वोपरि रखना, जियो-फेंसिंग प्रणाली का स्वतंत्र भारतीय परीक्षण, देश में सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति और पूर्व अनुमति के बिना सेवाएं बंद नहीं करने की गारंटी जैसे उपाय शामिल हैं।

स्थानीय निवेश और ग्रामीण कनेक्टिविटी को प्राथमिकता

दस्तावेज में विदेशी निवेश को सरकारी मंजूरी मार्ग के तहत अनुमति देने, भारत में परिचालन इकाई स्थापित करने और निर्धारित समयसीमा में उपयोगकर्ता टर्मिनलों का स्थानीय विनिर्माण शुरू करने की सिफारिश की गई है। सिद्धू ने दूरदराज के आकांक्षी और सीमावर्ती जिलों में स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा पंचायत कार्यालयों को इंटरनेट से जोड़ने की जिम्मेदारी भी कंपनियों को देने का सुझाव दिया है।

उन्होंने रक्षा और महत्वपूर्ण सरकारी संचार व्यवस्था को किसी एक विदेशी उपग्रह नेटवर्क पर निर्भर नहीं रखने तथा भारत की अपनी निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) उपग्रह क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने से पहले आपदा प्रबंधन एजेंसियों और जिला प्रशासन को सरकारी नियंत्रण वाले उपग्रह टर्मिनल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने पर जोर

दस्तावेज के मुताबिक, मई 2026 तक देश के 11,256 गांवों में 4जी नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। सिद्धू ने कहा कि हिमालयी और पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों, द्वीपों, रेगिस्तानी इलाकों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड उपयोगी हो सकता है। बाढ़, चक्रवात और संघर्ष जैसी परिस्थितियों में भी यह संचार का अहम माध्यम बन सकता है।

उन्होंने अमेजन की कुइपर सहित सभी कंपनियों के लिए समान नियम, स्पेक्ट्रम मूल्य और मंजूरी की समयसीमा तय करने, लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करने तथा तीन साल बाद स्वतंत्र समीक्षा कराने का सुझाव दिया है।