
कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आरजी कर अस्पताल में प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में पीड़िता के कथित जल्दबाजी में अंतिम संस्कार तथा साक्ष्य नष्ट किए जाने से जुड़े आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने राज्य पुलिस द्वारा की जा रही जांच सीबीआई को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया। इस मामले में पीड़िता के पिता ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार किए जाने, आपराधिक साजिश और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप लगाए थे।
इन आरोपों के संबंध में आठ अगस्त को उत्तर 24 परगना जिले के खरदह थाने में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत के आदेश के अनुसार, सीबीआई की विशेष जांच टीम (एसआईटी) अब इस मामले की जांच करेगी।
सुनवाई के दौरान खरदह थाने के प्रभारी निरीक्षक और जांच अधिकारी की अदालत में मौजूदगी का उल्लेख करते हुए पीठ ने उनके स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया। न्यायालय ने कहा, ‘‘हम दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की चेतावनी देते हैं।’’
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने 21 मई को आरजी कर मामले की जांच के लिए सीबीआई की तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। इस टीम को प्रशिक्षु चिकित्सक के नौ अगस्त 2024 की रात भोजन करने से लेकर उनके अंतिम संस्कार तक की घटनाओं और कथित बड़ी साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच का जिम्मा सौंपा गया था।
उत्तर कोलकाता स्थित आरजी कर सरकारी अस्पताल में नौ अगस्त 2024 की रात ड्यूटी पर तैनात प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश में व्यापक आक्रोश पैदा किया था।
मामले में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। हालांकि, पीड़िता के अंतिम संस्कार और साक्ष्य नष्ट किए जाने से जुड़े आरोपों की जांच अलग से जारी है।
न्यायालय के ताजा आदेश के बाद इन आरोपों की जांच सीबीआई करेगी, जबकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल भी केंद्रीय एजेंसी की विशेष जांच टीम द्वारा की जा रही है।






