शहीद निशान सिंह की समाधि बदहाल, अतिक्रमण और उपेक्षा के बीच विरासत
Martyr Nishan Singh's tomb is in a dilapidated state, a legacy amidst encroachment and neglect.

सासाराम: 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले वीर शहीद निशान सिंह की विरासत आज बदहाली का सामना कर रही है। सासाराम के गौरक्षणी स्थित निशान सिंह लाइब्रेरी परिसर में बनी उनकी समाधि के आसपास अतिक्रमण और रखरखाव की कमी की स्थिति सामने आई है। परिसर में पशुओं को बांधे जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

बताया जाता है कि बाबू कुंवर सिंह के सेनापति रहे निशान सिंह ने 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रोहतास के बद्दी गांव में जन्मे निशान सिंह को अंग्रेजों ने कैमूर पहाड़ी की एक गुफा से गिरफ्तार किया था, जिसे अब निशान सिंह गुफा के नाम से जाना जाता है।

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इतिहास से जुड़े विवरणों के अनुसार, 7 जून 1858 को अंग्रेजों ने सासाराम के गौरक्षणी इलाके में निशान सिंह को तोप के मुहाने पर बांधकर मौत की सजा दी थी। उनके साथ 12 अन्य विद्रोही साथियों को भी अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था।

बताया जाता है कि वर्ष 1956 में तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने निशान सिंह के समाधि स्थल का उद्घाटन किया था। हालांकि, समय के साथ संरक्षण और नियमित रखरखाव के अभाव में यह ऐतिहासिक स्थल बदहाल होता गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निशान सिंह के नाम पर एक एकड़ से अधिक जमीन है, लेकिन समाधि स्थल और सेंट्रल जिला लाइब्रेरी दोनों ही उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। समाधि परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने और इसके जीर्णोद्धार की मांग उठाई जा रही है।

हर वर्ष शहादत दिवस पर यहां माल्यार्पण कर शहीद निशान सिंह को श्रद्धांजलि दी जाती है, लेकिन स्थायी संरक्षण और विकास की जरूरत अब भी बनी हुई है।