डीलिस्ट पीएलपीए भूमि पर वन मंजूरी के लिए एकीकृत सर्कुलर की मांग
Unified circular for forest clearance on delisted PLPA lands sought

चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव के.बी.एस. सिद्धू ने पंजाब भूमि परिरक्षण अधिनियम (पीएलपीए), 1900 के तहत डीलिस्ट की गई भूमि से जुड़े वन मंजूरी मामलों के लिए मंत्रिपरिषद से स्वीकृत एकीकृत सर्कुलर जारी करने का सुझाव दिया है।

सिद्धू ने कहा कि वन विभाग की हालिया मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में चेकलिस्ट उपलब्ध कराने के बावजूद विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समस्या बनी हुई है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के लिए एक समान प्रक्रिया और समय-सीमा तय करने की जरूरत बताई।

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उन्होंने कहा कि वन विभाग की एसओपी में पीएलपीए के बंद और खुले क्षेत्रों से जुड़े मामलों के लिए 13 शर्तें निर्धारित की गई हैं। इसमें सार्वजनिक चेकलिस्ट, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी और जल निकायों से संबंधित वन मंडल अधिकारी की रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

सिद्धू के प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक डीलिस्ट खसरे को चार श्रेणियों में वर्गीकृत कर संबंधित नियामक प्राधिकरण तय किया जाए। साथ ही सभी विभागों के लिए एक समान ‘खसरा स्थिति प्रमाणपत्र’ जारी करने और मामलों के निपटारे के लिए निर्धारित समय-सीमा तय करने की व्यवस्था हो।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित सर्कुलर वर्ष 2009 में डीलिस्टिंग के समय केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई शर्तों या न्यायालय के आदेशों में बदलाव नहीं कर सकता। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से शहरी सीमाओं में डीलिस्ट आबादी वाली भूमि पर मालिक के अपने घर से संबंधित स्वीकृति को लेकर भी स्पष्टीकरण लेने का सुझाव दिया।

सिद्धू ने नयागांव नगर परिषद के तहत कांसल, करोरां और नाडा क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई परिवार भवन नक्शे की मंजूरी और सीवर कनेक्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में मुख्य सचिव और संबंधित प्रशासनिक सचिवों को सुझाव भेजे हैं।