धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में पारंपरिक ‘सैर’ उत्सव का विशेष सांस्कृतिक महत्व है। सावन और भादों के बाद मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति, नई फसल और समृद्धि के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा से जुड़ा है।
सैर के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल रहता है। लोग पारंपरिक व्यंजन तैयार करते हैं और परिवार व समुदाय के साथ मिलकर पर्व की खुशियां मनाते हैं।
बैजनाथ उपमंडल में सैर के दौरान बच्चों के बीच ‘अखरोट खेलने’ की परंपरा खास तौर पर लोकप्रिय है। बच्चे अखरोट से खेलते हैं और उन्हें एकत्र करते हैं। वहीं, कांगड़ा के कई क्षेत्रों में सैर से एक दिन पहले मौसमी फसलों से टोकरियां सजाकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें घर-घर ले जाने की परंपरा भी रही है।
सैर के दौरान आयोजित मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्र कांगड़ा की समृद्ध विरासत की झलक पेश करते हैं। ये आयोजन सामाजिक मेलजोल बढ़ाने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।







