Kashmiri Pandit employees threatened again, raising concerns about their safety

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। कथित तौर पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) की ओर से जारी धमकी भरे संदेशों में कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने की चेतावनी दी गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, करीब एक महीने के भीतर इस तरह की कई धमकियां सामने आई हैं। इनमें सरकारी कर्मचारियों की निजी जानकारी ऑनलाइन लीक किए जाने का भी दावा किया गया है। समुदाय से जुड़े लोगों ने इन घटनाओं को गंभीर सुरक्षा चिंता बताते हुए प्रशासन से तत्काल जांच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

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PM पैकेज के तहत बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित कर्मचारी घाटी में सरकारी सेवाएं दे रहे हैं। एक्टिविस्ट राकेश हांडू ने कथित धमकी को लेकर प्रधानमंत्री, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और पुलिस की साइबर क्राइम इकाई को शिकायत भेजकर FIR दर्ज करने की मांग की है।

समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि कई कर्मचारी किराए के मकानों में रहते हैं और कुछ ट्रांजिट आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने सुरक्षित आवास, सुरक्षा ऑडिट और कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

यह मामला कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी और पुनर्वास की नीति को लेकर भी अहम हो गया है। 2022 में सरकारी कर्मचारी राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे।

जम्मू-कश्मीर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब चुनौती इन ताजा धमकियों के स्रोत का पता लगाने के साथ-साथ कर्मचारियों में सुरक्षा का भरोसा कायम करने की है।