फगवाड़ा: उत्तर अमेरिकी पंजाबी एसोसिएशन (NAPA) ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा में सिख समुदाय से ऐतिहासिक रूप से जुड़ी जमीन की कथित नीलामी और व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। संगठन के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने मामले में पारदर्शी जांच और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की अपील की है।
चहल के अनुसार, बलूचिस्तान के विधायक रवि कुमार पूजा के कथित बयान में कहा गया है कि विवादित जमीन मूल रूप से सिख समुदाय की थी और गुरुद्वारा परिसर का हिस्सा थी। बताया गया है कि गुरुद्वारा समिति ने इस जमीन को शिक्षा के उद्देश्य से स्कूल स्थापित करने के लिए दान किया था।
NAPA का आरोप है कि इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड ने 2025 में जमीन की नीलामी की और कथित तौर पर एक निजी पक्ष ने इसे खरीद लिया। संगठन के मुताबिक, इसके बाद जमीन पर मौजूद गुरुद्वारा, चर्च और स्कूल को कथित रूप से हटाया गया और वहां व्यावसायिक प्लाजा का निर्माण किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की मांग की गई है।
चहल ने कहा कि यदि जमीन वास्तव में शिक्षा के उद्देश्य से दान की गई थी, तो उसके व्यावसायिक उपयोग के लिए नीलामी किए जाने की वैधता की जांच जरूरी है। उन्होंने पाकिस्तान सरकार, बलूचिस्तान सरकार और इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड से जमीन के स्वामित्व, दान, नीलामी, मूल्यांकन, खरीदार और निर्माण संबंधी मंजूरियों के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।
NAPA ने जांच पूरी होने तक विवादित स्थल पर चल रहे निर्माण को रोकने की भी अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में नीलामी या हस्तांतरण को गैरकानूनी पाया जाता है, तो संबंधित लेन-देन रद्द कर जमीन को उसके मूल सामुदायिक उद्देश्य के लिए बहाल किया जाना चाहिए।
संगठन ने क्वेटा के ऐतिहासिक सिख समुदाय से जुड़े धार्मिक और शैक्षणिक स्थलों के कथित विध्वंस की भी जांच तथा बलूचिस्तान में मौजूद अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक और विरासत संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।








