5,524 seats remain vacant in Betul's government colleges, and admissions remain unfilled even after four months of the admission process.

बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के शासकीय महाविद्यालयों में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग की करीब चार महीने चली प्रवेश प्रक्रिया और कई चरणों में दाखिले के बाद भी जिले के सरकारी कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर की 15,735 सीटों में से 10,211 पर ही प्रवेश हो सका। इस तरह 5,524 सीटें यानी करीब 35 प्रतिशत सीटें खाली रह गईं।

प्रवेश प्रक्रिया 31 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब इन सीटों पर दाखिले की संभावना बेहद कम मानी जा रही है और बड़ी संख्या में सीटों के पूरे सत्र खाली रहने की स्थिति बन गई है।

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यूजी की 3,145 सीटें नहीं भर सकीं

जिले के 10 सरकारी कॉलेजों में स्नातक स्तर पर कुल 10,640 सीटें निर्धारित थीं, जिनमें से 7,495 पर विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। 3,145 सीटें यानी 29.56 प्रतिशत खाली रह गईं।

जिला मुख्यालय स्थित शासकीय जेएच कॉलेज में 99 प्रतिशत से अधिक सीटें भर गईं, लेकिन तहसील और विकासखंड स्तर के कॉलेजों में दाखिले की स्थिति कमजोर रही। घोड़ाडोंगरी कॉलेज में सबसे खराब स्थिति देखने को मिली, जहां 87.78 प्रतिशत यूजी सीटें खाली रह गईं।

घोड़ाडोंगरी में बीए की 180 सीटों पर सिर्फ 38 और बीएससी की 360 सीटों पर 28 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। दोनों पाठ्यक्रमों को मिलाकर 474 सीटें खाली रह गईं। वहीं मुलताई में 51.85 प्रतिशत, आठनेर में 52.06 प्रतिशत, शाहपुर में 52.43 प्रतिशत और भीमपुर में 45.65 प्रतिशत यूजी सीटें नहीं भर सकीं।

पीजी में भी 38 फीसदी सीटें खाली

स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी दाखिले की स्थिति उत्साहजनक नहीं रही। जिले के आठ सरकारी कॉलेजों में पीजी की 3,945 सीटों में से 2,445 पर प्रवेश हुए, जबकि 1,500 सीटें यानी 38.02 प्रतिशत खाली रह गईं।

आमला में पीजी की 72.22 प्रतिशत सीटें खाली रहीं। मुलताई और आठनेर में यह आंकड़ा 70-70 प्रतिशत, कन्या महाविद्यालय बैतूल में 64.29 प्रतिशत और शाहपुर में 60 प्रतिशत रहा।

एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रमों में सबसे खराब स्थिति

एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रमों में स्थिति और चिंताजनक रही। जेएच कॉलेज बैतूल, आठनेर और भैंसदेही में कुल 1,150 सीटों पर सिर्फ 271 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।

आठनेर में एमए की सभी 160 सीटें खाली रह गईं। भैंसदेही में एमए की 160 और एमएससी की 150 सीटों पर एक भी दाखिला नहीं हुआ। इससे इन कॉलेजों में एक वर्षीय पीजी की कक्षाओं के संचालन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्रामीण कॉलेजों की उपयोगिता पर उठे सवाल

सरकारी कॉलेजों में लगातार बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित उच्च शिक्षण संस्थानों की उपयोगिता और पाठ्यक्रमों की मांग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विद्यार्थियों के दूसरे शहरों की ओर रुख करने को भी इसका एक संभावित कारण माना जा रहा है।

यदि आने वाले वर्षों में दाखिले की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कम छात्र संख्या वाले पाठ्यक्रमों और कॉलेजों के संचालन पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।