Uttarakhand HC refuses direct relief to seven law colleges on affiliation, directs university to take decision within two weeks

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने संबद्धता से जुड़े मामले में छह से अधिक लॉ कॉलेजों को फिलहाल कोई सीधी राहत नहीं दी है। अदालत ने सभी याचिकाकर्ताओं को संबंधित विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की पीठ ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय इन अभ्यावेदनों पर कानून के अनुसार दो सप्ताह के भीतर निर्णय ले। अदालत ने रुड़की स्थित चमन लॉ कॉलेज समेत कुल सात लॉ कॉलेजों की ओर से दायर याचिकाओं पर बुधवार को एक साथ सुनवाई की थी। आदेश की प्रति गुरुवार को उपलब्ध हुई।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत से विश्वविद्यालय को संबद्धता के संबंध में आवश्यक निर्देश देने तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की मंजूरी के लिए आवेदन की प्रक्रिया में सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके अलावा देरी के कारण लगने वाली लेट फीस और पेनल्टी से राहत देने का अनुरोध भी किया गया था।

लॉ कॉलेजों की ओर से बीसीआई के आवेदन की निर्धारित अंतिम तिथि 31 जुलाई को आगे बढ़ाने और इससे संबंधित सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी।

अदालत ने इन मांगों पर सीधे कोई अंतिम आदेश पारित करने के बजाय याचिकाकर्ताओं को विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन देने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 08 सितंबर तक प्रस्तुत किए जाने वाले अभ्यावेदनों पर दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप फैसला लिया जाए।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के निर्णय से असंतुष्ट होने की स्थिति में याचिकाकर्ताओं के लिए दोबारा उच्च न्यायालय का रुख करने का रास्ता बंद नहीं होगा।