Shankaracharya Adhokshajananda Devatirtha expressed grief over the Nepal disaster and appealed for relief and help for the affected people.

मथुरा: पूरब आम्नाय गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज ने नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में गोवर्धन मठ नेपाल के पीड़ित नागरिकों और श्रद्धालुओं के साथ मजबूती से खड़ा है।

शंकराचार्य ने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और लापता श्रद्धालुओं, पर्यटकों तथा स्थानीय नागरिकों के सुरक्षित वापस लौटने की कामना की। उन्होंने बताया कि मृतकों की आत्मा की शांति और लापता लोगों के सकुशल मिलने की प्रार्थना को लेकर गोवर्धन पीठ में विशेष महायज्ञ का आयोजन किया गया है।

GNSU Admission Open 2026

नेपाल में नुकसान अनुमान से ज्यादा: शंकराचार्य

स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि नेपाल में प्राकृतिक आपदा से हुआ नुकसान प्रारंभिक आकलन से कहीं अधिक है। बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए हैं और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने भारत और नेपाल सरकार के विभिन्न राहत एवं सुरक्षा तंत्रों की ओर से चलाए जा रहे खोज और बचाव अभियान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि पुलिस, अर्द्धसैनिक बल, भारतीय सेना और राहतकर्मी पूरी तत्परता से अभियान में जुटे हैं। शंकराचार्य ने भारत सरकार समेत अन्य देशों की सरकारों से नेपाल में अधिक से अधिक राहत सामग्री और जरूरी सहायता तत्काल भेजने की अपील की।

चीन से जवाबदेही तय करने की मांग

शंकराचार्य ने आपदा से जुड़े चेतावनी संकेतों के मुद्दे पर चीन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पहली बार भी ऐसी सूचना समय रहते उपलब्ध कराई जाती तो संभवतः बड़े स्तर पर जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता था।

उन्होंने चीन सरकार से नेपाल में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति करने और बेघर हुए लोगों के पुनर्वास के लिए मकान बनाने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बांध जैसी परियोजनाओं पर काम शुरू करने से पहले पड़ोसी देशों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए उनसे परामर्श किया जाना चाहिए।

शंकराचार्य ने भारत-चीन संबंधों में सुधार का स्वागत करते हुए कहा कि यह सकारात्मक कदम है, लेकिन क्षेत्रीय सहयोग के साथ पड़ोसी देशों के हितों और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।