Regarding the Kumbh Mela preparations, Fadnavis said that after the current difficulties, people will appreciate the development work.

नासिक: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 2027-28 के सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले चल रहे विकास एवं बुनियादी ढांचा कार्यों को लेकर लोगों को हो रही परेशानी को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाएं एक साथ शुरू होने के कारण जनता को असुविधा हो रही है और सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन काम पूरा होने के बाद इसका लाभ लंबे समय तक मिलेगा।

फडणवीस ने कहा कि नासिक और त्र्यंबकेश्वर में विकास कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को हो रही परेशानियों और उनकी नाराजगी को सरकार समझती है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इन कार्यों को लेकर लोगों की आलोचना सुननी पड़ रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलाव और विकास में समय लगता है और इसे रातोंरात पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि परियोजनाएं पूरी होने के बाद यही लोग विकास कार्यों की सराहना करेंगे और सरकार को अपना समर्थन देंगे।

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कुंभ की तैयारियां समय पर पूरी करना चुनौती

फडणवीस ने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेले के आयोजन में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, इसलिए सभी तैयारियों को समय पर पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के काम की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारी पूरी लगन से परियोजनाओं को पूरा करने में जुटे हैं।उन्होंने महापौरों और पार्षदों से भी विकास कार्यों को लेकर पीछे नहीं हटने तथा जरूरी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की अपील की।

साधुग्राम के लिए 2,500 करोड़ में जमीन खरीदने की योजना

मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय ‘सिंहस्थ महाकुंभ भक्ति संगम’ कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि कुंभ मेले के लिए जिस जमीन पर साधुग्राम विकसित किया जा रहा है, उसे सरकार स्थायी रूप से अधिग्रहीत करेगी। इसके लिए करीब 2,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जमीन का इस्तेमाल केवल आगामी कुंभ मेले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में आयोजित होने वाले कुंभ मेलों के दौरान भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। इससे आने वाले आयोजनों की तैयारियों में सुविधा मिलने की उम्मीद है।फडणवीस ने कहा कि सरकार का लक्ष्य कुंभ मेले के लिए ऐसी स्थायी और आधुनिक सुविधाएं तैयार करना है, जिनका लाभ आयोजन के बाद भी नासिक और त्र्यंबकेश्वर के लोगों को मिलता रहे।