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5 साल की उम्र में मेरठ गया जफर, 19 साल बाद आतंकी कनेक्शन में गिरफ्तारी से गांव में हड़कंप

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Zafar went to Meerut at the age of 5, but his arrest 19 years later for terrorist connections caused a stir in the village.

पूर्णिया: बिहार के सीमांचल इलाके से जुड़ा एक मामला सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा रहा है। पूर्णिया जिले के रौटा थाना क्षेत्र के मीरगंज गांव का रहने वाला 24 वर्षीय मोहम्मद जफर उत्तर प्रदेश के मेरठ में यूपी एटीएस की कार्रवाई के बाद कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि जफर महज पांच साल की उम्र में पढ़ाई के लिए मेरठ चला गया था और वहीं रहकर मौलवी व हाफिज की तालीम हासिल की। यूपी एटीएस के आरोपों के मुताबिक, जफर धर्मगुरु और मौलवी की आड़ में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहा था। उस पर मदरसों और चंदे के नाम पर रकम जुटाने, कथित तौर पर उसे पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं तक पहुंचाने और युवाओं के बीच जिहादी साहित्य बांटकर उनका ब्रेनवॉश करने के आरोप हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जफर के परिवार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जफर के पिता मो. जहीर के मुताबिक, उनका बेटा जब महज पांच साल का था, तभी उसे पढ़ाई के लिए मेरठ भेज दिया गया था। उन्होंने बताया कि जफर ने वहां रहकर मौलवी और हाफिज की तालीम हासिल की और लंबे समय से मदरसे के लिए चंदा जुटाने का काम करता था।

पिता का कहना है कि जफर पर देशविरोधी गतिविधियों या किसी आतंकी संगठन से जुड़ने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद और झूठे हैं। परिवार ने सरकार और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद वास्तविक सच्चाई सामने आ जाएगी। जफर की गिरफ्तारी की खबर मीरगंज गांव पहुंचते ही परिवार में हड़कंप मच गया। बेटे पर आतंकी संगठन के लिए कथित फंडिंग और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगने के बाद परिजन सदमे में हैं। जफर की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि उनका बेटा सीधा-सादा था और हमेशा पढ़ाई-लिखाई और तालीम की बात करता था। परिवार को यकीन नहीं हो रहा कि उस पर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जफर के पड़ोसी हसनैन और स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, जफर जब भी कभी मीरगंज गांव आता था तो उसका व्यवहार सामान्य और मिलनसार रहता था। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रहते हुए कभी किसी को उसके किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने का शक नहीं हुआ। हालांकि, यूपी एटीएस की कार्रवाई के बाद अब स्थानीय स्तर पर भी उसके पुराने संपर्कों और गतिविधियों को लेकर जांच शुरू हो गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रौटा थाना पुलिस भी सक्रिय हो गई। पुलिस टीम जफर के मीरगंज स्थित घर पहुंची और उसके परिजनों से पूछताछ की।

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पुलिस यह जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है कि जफर कब से मेरठ में रह रहा था, वहां उसकी गतिविधियां क्या थीं और उसके किन लोगों से संपर्क थे। पूर्णिया पुलिस स्थानीय स्तर पर मामले से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है। पूर्णिया के वरीय पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुमन ने बताया कि फिलहाल यूपी एटीएस की ओर से इस मामले में पूर्णिया पुलिस को कोई आधिकारिक लिखित पत्राचार प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है। इसलिए पूर्णिया पुलिस अपने स्थानीय खुफिया तंत्र के माध्यम से जफर के पारिवारिक इतिहास, उसकी गतिविधियों और संपर्कों की गहनता से जांच करा रही है। आधिकारिक जानकारी और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूर्णिया समेत सीमांचल का इलाका सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। नेपाल और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं। अतीत में भी इस इलाके से संदिग्ध आतंकियों और जासूसी गतिविधियों के तार जुड़ने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में मेरठ में जफर की गिरफ्तारी के बाद पूर्णिया और पूरे सीमांचल क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। फिलहाल मामले में सबसे अहम बात यूपी एटीएस की जांच और उसके आधार पर सामने आने वाले आधिकारिक तथ्य होंगे। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के खंडन और पुलिस की स्थानीय जांच के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जफर के खिलाफ जांच में क्या-क्या तथ्य सामने आते हैं।