बक्सर। बिहार के व्यवहार न्यायालयों में कार्यरत कर्मचारी अपनी लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मांगों के समर्थन में सात अक्टूबर को पूरे राज्य में काला दिवस मनाएंगे। बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ ने कहा है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में कर्मचारी दो नवंबर से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय ले सकते हैं।
संघ के अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी ने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने न्यायिक परिवार के अभिभावक के रूप में मुख्य न्यायाधीश से कर्मचारियों की वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान कराने और सम्मानजनक व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
संघ के अनुसार, नौ अगस्त को पटना के गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर आयोजित आमसभा में कर्मचारियों की मांगों को लेकर चरणबद्ध और शांतिपूर्ण आंदोलन का निर्णय लिया गया था। इसी कार्यक्रम के तहत सात अक्टूबर को राज्य के सभी व्यवहार न्यायालयों के कर्मचारी काली पट्टी बांधकर अपने नियमित न्यायिक और कार्यालयी कार्य करेंगे।
संघ ने स्पष्ट किया है कि काला दिवस मनाने के दौरान न्यायालय की गरिमा और अनुशासन बनाए रखा जाएगा। साथ ही आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य लंबित सेवा संबंधी मामलों के समाधान के लिए सरकार और न्यायिक प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है।
संघ की प्रमुख मांगों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और पटना उच्च न्यायालय की स्थायी समिति की अनुशंसाओं को लागू करना शामिल है। इसके अलावा कर्मचारियों के संवर्ग का पुनर्गठन, एक जनवरी 2006 से वेतन पुनरीक्षण, लंबित पदोन्नति और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों का निष्पादन करने की मांग की गई है।
कर्मचारियों ने पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने, स्वास्थ्य एवं शिक्षा भत्ता देने तथा पुरानी पेंशन योजना लागू करने को लेकर भी निर्णय लेने की मांग की है।
संघ ने कहा है कि सात अक्टूबर के आंदोलन के बाद भी यदि मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं होती है तो दो नवंबर से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश शुरू किया जाएगा। संघ ने मुख्य न्यायाधीश से समय रहते हस्तक्षेप कर ऐसा समाधान निकालने की अपील की है, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति को टाला जा सके।







