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कला की साधना को मिला सरकार का सम्मान, कलाकार पेंशन बनी बुढ़ापे की मजबूत लाठी

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The pursuit of art has received government recognition, with artist pension becoming a strong support in old age.

पटना: बिहार सरकार की जनकल्याणकारी योजना कलाकार पेंशन म्यूजिक, पेंटिंग, नृत्य, तबलावादन, बांसुरीवादन समेत अन्य क्षेत्रों के कलाकारों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। योजना के लाभार्थी कलाकारों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हर महीने पेंशन देकर हम कलाकारों को बुढ़ापे के लाचार दिनों में मजबूत सहारा प्रदान किया है। मधुबनी जिले के रहने वाले मशहूर मिथिला पेंटर 57 वर्षीय मिथिलेश कुमार झा ने कहा कि बिहार सरकार ने हम कलाकारों के लिए यह योजना लाकर हमारी सेवा की है। शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद सरकार ने कभी उन्हें असहाय नहीं माना। दिव्यांग पेंशन योजना ने भी उनके हुनर को चार-चांद लगाने में काफी मदद की।मिथिला पेंटिंग की तालीम उन्होंने अपनी दादी से हासिल की थी। उनकी दादी सीता देवी मिथिला पेंटिंग को कागज पर हूबहू उतारने में माहिर थीं। उन्होंने बताया कि उनकी दादी 17 साल की उम्र से मिथिला पेंटिंग कर रही थीं। वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मधुबनी में उनके घर आए और उनके द्वारा बनाई गई मिथिला पेंटिंग की सराहना की। साथ ही, उन्होंने मिथिला आर्ट को और बेहतर करने के लिए उनसे सलाह भी मांगी।


मशहूर मिथिला पेंटर मिथिलेश कुमार झा की दादी सीता देवी को पद्मश्री, नेशनल अवार्ड व अन्य कई सम्मानों से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने उनके परिवार को उपलब्धियां हासिल करने में साथ दिया है। 60 वर्षीय भोजपुरी लोकगीत गायक सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि वर्ष 1989 में पहली बार उन्हें रेडियो चैनल विविध भारती पर गाना गाने का मौका मिला। उन्होंने बिहार सरकार के कई कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दी है। कलाकार पेंशन योजना का लाभ मिलने से उन्हें बुढ़ापे में मजबूत सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि बिहार के यशस्वी युवा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार के सभी जन-जन के विकास के लिए सरकार तत्परता से कार्य कर रही है।

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मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना राज्य के उन कलाकारों को आर्थिक सहयोग प्रदान करने की महत्वपूर्ण पहल है, जिन्होंने कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस योजना के अंतर्गत पात्र कलाकारों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन राशि उपलब्ध कराई जाती है। योजना के माध्यम से लोक कलाकारों, रंगकर्मियों, गायकों, वादकों तथा विभिन्न पारंपरिक कला विधाओं से जुड़े कलाकारों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।