
वेस्ट एशिया: क्षेत्र में जारी टकराव और बढ़ते सुरक्षा तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी ड्रोन क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पहली बहुराष्ट्रीय और मल्टी-डोमेन अटैक ड्रोन टास्क फोर्स बनाने की योजना का ऐलान किया है। इसका नाम ‘टास्क फोर्स फाल्कन स्ट्राइक’ रखा गया है।
CENTCOM के मुताबिक, इस पहल के तहत अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार हवा, समुद्र की सतह और समुद्र के नीचे संचालित होने वाले मानवरहित सिस्टम को एक साझा ढांचे में शामिल करेंगे। इसमें वन-वे अटैक ड्रोन के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों में ऑपरेट करने वाले अन्य मानवरहित सिस्टम भी शामिल होंगे।
इस टास्क फोर्स का उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ड्रोन क्षमताओं को एकीकृत कर एक प्रभावी मल्टी-डोमेन ताकत तैयार करना है। CENTCOM ने क्षेत्रीय देशों के साथ बातचीत शुरू कर दी है और संभावित साझेदारों को इस पहल में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है।
‘स्कॉर्पियन स्ट्राइक’ के बाद नया कदम
‘फाल्कन स्ट्राइक’ की घोषणा टास्क फोर्स ‘स्कॉर्पियन स्ट्राइक’ के गठन के करीब नौ महीने बाद हुई है। अमेरिकी सेना ने स्कॉर्पियन स्ट्राइक को मध्य पूर्व में अपनी पहली समर्पित वन-वे अटैक ड्रोन यूनिट बताया था।
CENTCOM के अनुसार, स्कॉर्पियन स्ट्राइक ने कई ऑपरेशनल गतिविधियों में मानवरहित प्रणालियों का इस्तेमाल किया है। इनमें अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत से एरियल अटैक ड्रोन का लॉन्च और ईरानी पोर्ट फैसिलिटी पर हमले के दौरान मानवरहित अटैक वेसल का इस्तेमाल शामिल बताया गया है।
CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि ‘फाल्कन स्ट्राइक’ स्कॉर्पियन स्ट्राइक की सफलता को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ नई क्षमताओं को एकीकृत और तैनात करने से भविष्य की संभावनाओं को समझने में मदद मिलेगी।
क्षेत्रीय साझेदार भी होंगे शामिल
नई टास्क फोर्स के स्टाफ का नेतृत्व यूएस स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंट्रल (SOCCENT) के अधिकारी करेंगे। इसी कमांड के अधिकारियों ने टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक की शुरुआत की थी। नई टीम में अमेरिकी अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय साझेदार देशों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
अमेरिका के मुताबिक, फाल्कन स्ट्राइक का लक्ष्य एक ऐसा एकीकृत और बहुराष्ट्रीय डिटरेंस तैयार करना है, जो वेस्ट एशिया में तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों का जवाब दे सके। यह पहल मानवरहित और ड्रोन तकनीक को अलग-अलग ऑपरेशनल डोमेन में इस्तेमाल करने की अमेरिकी रणनीति को भी दर्शाती है।






