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एसएफआई नेता आइसी घोष की गिरफ्तारी के प्रयास का मुद्दा उठा राज्यसभा में

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The issue of attempted arrest of SFI leader A.C. Ghosh was raised in the Rajya Sabha.

नयी दिल्ली: वाम दलों तथा अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने स्टूडेन्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की संयुक्त सचिव आइसी घोष की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की कोशिश का मामला बुधवार को राज्यसभा में उठाया और इसके चलते हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बारह बजे तक स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के कारण लगातार आठवें दिन भी शून्यकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी। सभापति सी पी राधाकृष्णन ने हंगामे के बीच शून्यकाल चलाना चाहा लेकिन विपक्ष के बढते हंगामे के कारण उन्हें कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद श्री राधाकृष्णन ने जैसे ही शून्यकाल शुरू करना चाहा विपक्ष के सदस्यों ने यह मामला उठाना शुरू कर दिया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जान ब्रिटास ने कहा कि सभी दलों की ओर से वह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि मंगलवार को संसदीय लोकतंत्र में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। दिल्ली पुलिस की टीम ने राष्ट्रीय पार्टी माकपा के मुख्यालय में घुसकर एसएफआई नेता आइसी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश की।

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श्री ब्रिटास ने कहा कि वह मौके पर मौजूद थे और गिरफ्तारी का कारण पूछे जाने पर दिल्ली पुलिस ने बताया कि सुश्री घोष छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने जंतर मंतर पर गयी थी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह भी बताया कि यह गिरफ्तारी 2021 के जे एन यू परिसर के एक मामले में की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपत्ति की बात यह भी है कि दिल्ली पुलिस के लोग बिना वर्दी के मुख्यालय में आये थे उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा डर का माहौल बनाया जा रहा है । उन्होंने मांग की कि गृह मंत्री बतायें कि यह क्या मामला है। नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अभी जो मुद्दा उठाया गया है यह शर्मनाक घटना है। इसमें राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में घुस कर गिरफ्तार करने की कोशिश की गयी है यह उचित नहीं है और इस मामले में दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि वह भी छात्र नेता रहे हैं और उन्हें भी आपातकाल में कॉलेज से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि छात्र राजनीतिक कार्यकर्ता हैं तो उन्हें इसके लिए तैयार रहना चाहिए। यह सामान्य प्रक्रिया है। पुलिस ने कानून व्यवस्था की प्रक्रिया के तहत अपना काम करने की कोशिश की है । उन्होंने कहा कि यह सामान्य स्थिति। इस बीच विपक्ष के सदस्यों ने अपनी जगह से उठकर नारेबाजी शुरू कर दी। वह इस मामले में गृह मंत्री से जवाब की मांग कर रहे थे। सभापति ने हंगामे के बीच शून्यकाल की कार्यवाही चलाने की कोशिश की लेकिन सदन में बढते शोर शराबे को देखते हुए उन्होंने कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। मानसून सत्र का आज आठवां दिन है और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण पिछले सात दिनों के दौरान सदन में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका है।