
मुंबई: महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए हाल ही में हुए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) 2026 में अंकों को लेकर घोटाला किये जाने का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सीईटी 2026 परीक्षा में बड़े पैमाने पर अंक घोटाले (ग्रेडिंग स्कैम) को अंजाम दिया गया है क्योंकि 12वीं की परीक्षा में साधारण अंक पाने वाले छात्रों ने रहस्यमयी ढंग से 100 पर्सेंटाइल रैंक हासिल कर ली है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने मेरिट लिस्ट में भारी गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा 35 से 40 प्रतिशत अंकों के साथ बमुश्किल पास की थी, वे महाराष्ट्र -सीईटी में 90 से 100 पर्सेंटाइल लाने में सफल रहे।
इस मुद्दे ने तब और तूल पकड़ लिया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार और एनसीपी नेता महादेव बालगुड़े ने भी ऐसे ही गंभीर सवाल उठाए। श्री बालगुड़े ने सोशल मीडिया पर एक प्रमुख शिक्षक का बनाया एक खोजी वीडियो साझा कर मामले को और बढ़ा दिया। वायरल हुए इस वीडियो में मूल्यांकन प्रणाली के भीतर पैसों के लेनदेन, मेरिट रैंकिंग में हेरफेर और प्रणालीगत भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
राज्य सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बावजूद, न तो परीक्षा प्राधिकरण (सीईटी सेल) और न ही राज्य के शिक्षा अधिकारियों ने इन कथित अनियमितताओं के संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। इस घोटाले ने हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को असमंजस में डाल दिया है जिसे लेकर राज्य के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग तेजी से जोर पकड़ रही है।
गौरतलब है कि सीईटी परीक्षा राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षा होती है। इसके जरिए छात्रों को स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर के पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिला मिलता है। विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, फार्मेसी, विधि या कृषि जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अलग-अलग परीक्षा देने के बजाय एक ही कॉमन परीक्षा आयोजित की जाती है। सीईटी परीक्षा में प्राप्त अंकों या पर्सेंटाइल के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाई जाती है और फिर काउंसलिंग के जरिए छात्रों को उनकी पसंद के कॉलेज और कोर्स में प्रवेश दिया जाता है।






