Home राष्ट्रीय विदेशी ताकतें भारत में बांग्लादेश-श्रीलंका जैसा माहौल चाहती थीं: विजयवर्गीय

विदेशी ताकतें भारत में बांग्लादेश-श्रीलंका जैसा माहौल चाहती थीं: विजयवर्गीय

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Foreign powers wanted Bangladesh-Sri Lanka like situation in India: VijayvargiyaForeign powers wanted Bangladesh-Sri Lanka like situation in India: Vijayvargiya

इंदौर/भोपाल: मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ विदेशी ताकतें भारत में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां पैदा करना चाहती थीं, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उनके मंसूबे विफल हो गए। श्री विजयवर्गीय ने शनिवार रात इंदौर में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस के विरोध जुलूस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस की भूमिका पूरी तरह राजनीतिक अवसरवाद से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन का हवाला दिया जा रहा है, उसमें छात्रों ने आंदोलन किया और पुलिस की कार्रवाई हुई, लेकिन कांग्रेस बाद में राजनीतिक लाभ लेने के लिए मैदान में उतरी।


उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष पूरी तरह निराश हो चुका था और उसे इस मुद्दे में राजनीति की नई संभावना दिखाई दी। उनका आरोप था कि इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस का कोई वास्तविक योगदान नहीं था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री विजयवर्गीय ने कहा कि उन्हें पहले आरएसएस को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरएसएस नहीं होती तो देश की स्थिति की कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उनके अनुसार देश आज जिस व्यवस्था और अनुशासन के साथ आगे बढ़ रहा है, उसके पीछे आरएसएस स्वयंसेवकों की वर्षों की मेहनत है।

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धर्मेंद्र प्रधान की कार्यशैली की सराहना करते हुए श्री विजयवर्गीय ने कहा कि वह उन्हें विद्यार्थी परिषद के समय से जानते हैं। उन्होंने कहा कि श्री प्रधान ने पार्टी नेतृत्व से स्वयं कहा था कि यदि पार्टी उचित समझे तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। बाद में पार्टी के सामूहिक निर्णय के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। उनके अनुसार यही एक अनुशासित कार्यकर्ता की पहचान है कि वह पद से ऊपर संगठन और देश को रखता है।


श्री विजयवर्गीय ने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उन विदेशी ताकतों के मंसूबों पर पानी फिर गया, जो भारत में हिंसा और अस्थिरता फैलाना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां देश में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी परिस्थितियां पैदा करना चाहती थीं, लेकिन उनका यह प्रयास सफल नहीं हो सका।