
नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में दोनों महान विभूतियों का योगदान अमूल्य रहा है और उनके आदर्श आज भी देशवासियों को प्रेरित करते हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानतम नेताओं में से एक बताया। वहीं चंद्रशेखर आजाद को उन्होंने निडर क्रांतिकारी बताते हुए कहा कि उनका साहस और राष्ट्रभक्ति आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।
श्री मोदी ने लोकमान्य तिलक को याद करते हुए कहा, “लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। भारत की आजादी की लड़ाई के एक महान नेता, जिन्होंने राष्ट्रवाद की भावना जगाई और पीढ़ियों को लोगों की सेवा के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया। हमारी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने और भाईचारे की भावना को बढ़ाने के उनके प्रयास भी उतने ही प्रेरणादायक थे। उनकी लेखनी ने लोगों में नया आत्मविश्वास जगाया और गर्व की भावना को बढ़ाया।”
श्री मोदी ने चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “बहादुर चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनका निडर साहस और अटूट देशभक्ति भारत की आजादी की लड़ाई के इतिहास में गर्व का स्थान रखती है। उन्होंने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया। उनका संकल्प पीढ़ियों को प्रेरित करता रहता है।”
उल्लेखनीय है कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को हुआ था। उन्हें भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक माना जाता है। ‘लोकमान्य’ के नाम से मशहूर वे स्व-शासन की मांग करने वाले शुरुआती नेताओं में से एक थे। उनका ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ नारा लोकप्रिय बना। श्री तिलक ने अपने समाचार पत्रों ‘केसरी’ और ‘मराठा’ के माध्यम से ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनमत तैयार किया और राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के लिए गणेश उत्सव और शिवाजी जयंती जैसे सार्वजनिक आयोजनों का उपयोग किया।
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक के रूप में उभरे। उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचएसआरए) के एक अहम सदस्य के रूप में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे नेताओं के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में अहम भूमिका निभाई। आजाद ने कभी भी अंग्रेजों के हाथों जिंदा न पकड़े जाने का संकल्प लिया था और वे इस संकल्प के प्रतीक बन गए। वर्ष 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में हुई मुठभेड़ के दौरान
उन्होंने अपना यह संकल्प पूरा किया। प्रधानमंत्री की यह श्रद्धांजलि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को स्मरण करने और देश की आजादी के संघर्ष में उनकी भूमिका को रेखांकित करने के केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर देशभर में विभिन्न स्मृति कार्यक्रमों, शैक्षणिक आयोजनों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाता है, जिनमें भारत के इतिहास में उनके अमूल्य और स्थायी योगदान को याद किया जाता है।






