नयी दिल्ली: कांग्रेस ने कहा है कि सरकार पेपर लीक से जुड़ी विफलताओं पर जवाबदेही से बच रही सरकार की तरफ से सामने आए वरिष्ठ मंत्री जे.पी. नड्डा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी के सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय केवल इधर उधर की राजनीति ही की है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर गुरुवार को कहा कि बुधवार देर रात सरकार का पक्ष रखने के लिए सामने आए श्री नड्डा को विपक्ष पर उंगली उठाने के बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री की विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने परीक्षा प्रणाली के केंद्रीकरण के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की स्थापना की, लेकिन इसके गठन के बाद से लगातार पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताएं सामने आती रही हैं।
उन्होंने कहा कि 2024 के पेपर लीक के बाद सरकार ने सुधार का वादा करते हुए के. राधाकृष्णन समिति का गठन किया, जिसने एनटीए में सुधार के लिए 101 सिफारिशें दीं, लेकिन उन्हें गंभीरता से लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए के महानिदेशक का महत्वपूर्ण पद लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चलता रहा, जिसके परिणामस्वरूप नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
एनटीए और उच्च शिक्षा विभाग ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के समक्ष भी पेपर लीक से इनकार किया तथा समिति की सिफारिशों को भी नजरअंदाज किया। उनका कहना था कि यूजीसी-नेट 2026 की परीक्षाओं में भी पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब छात्र पेपर लीक और शिक्षा नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे तो सरकार ने उनके खिलाफ बल प्रयोग किया। उनका कहना था कि नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक केवल एक घटना नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कार्यप्रणाली, एनटीए की विफलताओं और मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों की गहरी खामियों का परिणाम है।







