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हाईकोर्ट की एम्स को फटकार, एसएमए पीड़ित बच्ची के इलाज में देरी पर 23 जुलाई तक जवाब तलब

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High Court reprimands AIIMS, seeks reply by July 23 on delay in treatment of SMA-afflicted girl

इंदौर: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 से पीड़ित तीन वर्षीय अनिका शर्मा के इलाज में हो रही देरी पर गंभीरता व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली को 23 जुलाई तक अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।
न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर याचिकाकर्ता ने इसका विरोध किया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उपचार के लिए आवश्यक अधिकांश राशि जुटाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद इलाज शुरू नहीं किया जा रहा है।


अनिका की ओर से अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने दायर रिट याचिका (क्रमांक 10849/2026) में कहा है कि बच्ची एसएमए टाइप-2 बीमारी से पीड़ित है, जिसके उपचार के लिए लगभग 9.5 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। याचिका के अनुसार परिजन केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 50 लाख रुपये सहित करीब 7.5 करोड़ रुपये स्वयं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से जुटा चुके हैं।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि उपचार के लिए अब अपेक्षाकृत कम राशि की आवश्यकता शेष है, लेकिन एम्स द्वारा इलाज प्रारंभ नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि उपचार में हो रही देरी बच्ची के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर रही है।


याचिका में यह भी कहा गया है कि परिजनों के अनुसार एम्स ने केंद्र सरकार से स्वीकृत राशि की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाली कंपनी से इनवॉइस मंगाने की बात कही है। वहीं, सामाजिक संगठनों द्वारा जुटाई गई राशि भी इनवॉइस के अभाव में जारी नहीं हो पा रही है, जिससे उपचार शुरू होने में विलंब हो रहा है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिवादी क्रमांक-2 (एम्स) को हर हाल में 23 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए तथा अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की।