वाशिंगटन: होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर जारी लड़ाई के बीच अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर हमले किए। अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने ईरान के खिलाफ हमलों का एक नया दौर शुरू किया है, क्योंकि दोनों पक्ष होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बीबीसी एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि इन हमलों का मकसद “ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमज़ोर करना” है । साथ ही कमान ने बताया कि जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के तहत उसने एक जहाज़ पर कब्ज़ा किया है।
ईरान के सरकारी मीडिया ने खबर दी कि अमेरिकी मिसाइलें जलडमरूमध्य के पास स्थित केशम द्वीप के करीब और साथ ही बंदर अब्बास और बुशहर (जहां एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र है) में गिरीं। तनाव बढ़ने के संकेत के तौर पर, यह भी बताया गया कि होर्मुज़गन प्रांत में दो पुलों को निशाना बनाया गया। बीबीसी ने होर्मुज़गन प्रांत में बंदर अब्बास के पश्चिम में स्थित एक पुल पर हुए हमले की पुष्टि की है। इस हफ़्ते की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि अगर वह बातचीत के लिए वापस नहीं आया, तो वे ईरान के पुलों और ऊर्जा सयंत्रों पर हमला करेंगे।
अप्रैल में श्री ट्रंप के यह कहने के बाद कि अमेरिका ईरान में आम नागरिकों से जुड़ी सुविधाओं (जैसे पुल और ऊजा सयंत्रों पर बमबारी करेगा, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि “आम नागरिकों और उनसे जुड़ी सुविधाओं पर जान-बूझकर हमला करना युद्ध अपराध है”। युद्ध के दौरान मानवीय व्यवहार पर 1949 के जिनेवा कन्वेंशन में आम नागरिकों के लिए ज़रूरी जगहों पर हमले करने की मनाही है। सेंटकॉम ने यह भी कहा कि मंगलवार रात से ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की दोबारा शुरू हुई नाकेबंदी के तहत मरीन सैनिकों ने ओमान की खाड़ी में एक ऑयल टैंकर पर कब्ज़ा किया।
उसने आगे कहा कि उसने “नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे 3 वाणिज्यिक जहाज़ों का रास्ता बदल दिया”। सेंटकॉम के मुताबिक, 13 अप्रैल से 18 जून के बीच ईरान के बंदरगाहों पर पिछली नाकेबंदी के दौरान अमेरिकी सेना ने नौ जहाज़ों को बेकार कर दिया था और 140 से ज़्यादा जहाज़ों का रास्ता बदल दिया था। युद्ध खत्म करने के शुरुआती समझौते पर फिर से शुरू हुई लड़ाई की वजह से और दबाव बढ़ गया है। इस बीच, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने गुरुवार को कहा कि ट्रंप ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जब वे अमेरिका से कही अपनी बातों से मुकरेंगे, तो राष्ट्रपति उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराएंगे। लेकिन साथ ही, वे हमेशा कूटनीति के रास्ते पर चलने के लिए भी तैयार हैं।” उन्होंने बताया कि ईरान ने कहा है कि वह अभी भी अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। उन्होंने आगे कहा, “हम उनसे बातचीत कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति उन्हें जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में जहाजों पर हमला करने की इजाज़त नहीं देंगे, बिना इसके नतीजे भुगते।”
जैसे-जैसे हमले बढ़ रहे हैं, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। यह ईरान के तट के पास एक अहम समुद्री रास्ता है जिसे तेहरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में असल में बंद कर दिया था। इससे पहले गुरुवार को तेहरान ने कहा कि उसने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जबकि अमेरिका ने कहा कि उसने जलडमरूमध्य में कई जगहों पर छह घंटे तक लगातार हमले किए हैं।







