बेंगलुरु: कर्नाटक ने मंगलवार को तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ने के फैसले को 15 जुलाई को होने वाली कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक तक के लिए टाल दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि पानी के बंटवारे को लेकर बढ़ते दबाव के बीच राज्य अपने हितों की मजबूती से रक्षा करेगा।
अपने आधिकारिक निवास कृष्णा के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री शिवकुमार ने कहा कि पड़ोसी राज्य को पानी छोड़ने के बारे में कोई भी निर्णय लेने से पहले कर्नाटक प्राधिकरण के सामने राज्य की पेयजल आवश्यकताओं और किसानों की चिंताओं को प्रमुखता से रखेगा।
उन्होंने कहा, “हमें अपने किसानों के हितों की रक्षा करनी है, अपने लोगों के लिए पीने का पानी सुनिश्चित करना है और कावेरी जल बंटवारे पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन भी करना है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार के फैसले की घोषणा प्राधिकरण की बैठक के बाद की जाएगी। यह बयान कावेरी क्षेत्र, विशेष रूप से मांड्या के विधायकों की ओर से लगातार बढ़ रही उन मांगों के बीच आया है, जिसमें उन्होंने राज्य की अपनी आवश्यकताओं को देखते हुए पानी छोड़ने पर रोक लगाने का आग्रह किया है।
श्री शिवकुमार ने बताया कि मांड्या और श्रीरंगपट्टना के विधायकों के साथ-साथ जिले के प्रभारी मंत्री ने उनसे मुलाकात की थी और इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने कहा, “हमने उनके विचारों को ध्यान में रखा है। प्राधिकरण के सामने कर्नाटक का पक्ष रखने के बाद सरकार इस पर निर्णय लेगी।” एक अन्य घोषणा में मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक विधानमंडल का मानसून सत्र 6 अगस्त से प्रस्तावित है।







