फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने फैसले को न्याय और इंसाफ की जीत बताया है। वहीं न्यायालय ने अपने फैसले में इस हत्याकांड को जघन्य, निर्मम और क्रूर बताते हुए कहा कि इस घटना ने समाज के पारिवारिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बच्चू सारंग ने अपने निर्णय में कहा कि यह अपराध रिश्तों को कलंकित करने वाला है और यदि ऐसे अपराधी के प्रति नरम रुख अपनाया गया तो समाज का अपने करीबियों और रिश्तेदारों पर से विश्वास उठ जाएगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि दोषी को फांसी से कम सजा दिए जाने पर जेल से बाहर आने के बाद मृतक बालक की मां रति शर्मा और उनके परिवार की सुरक्षा को स्थायी खतरा बना रहेगा।
न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि दोषी जितेंद्र पाठक रिश्ते में बच्चे का चाचा लगता था, जिसका पहला कर्तव्य अपने भतीजे की रक्षा करना था। इसके विपरीत उसने निजी स्वार्थ और वासना की पूर्ति के लिए डेढ़ वर्षीय मासूम को रास्ते की बाधा समझ लिया और उसे जमीन पर पटक-पटक कर तब तक मारता रहा, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। न्यायालय ने माना कि यह कोई आवेश में किया गया अपराध नहीं था, बल्कि सुनियोजित, सोची-समझी और अत्यंत क्रूर हत्या थी।
मृतक बालक की मां रति शर्मा, जो अपने वैवाहिक विवाद के कारण अपनी मां के साथ गांव वामई में रह रही हैं, ने कहा कि मात्र 40 दिनों में न्याय मिलना इंसाफ की जीत है। उन्होंने और उनके परिजनों ने कहा कि जिस प्रकार उनके मासूम बच्चे ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा, उसी प्रकार वे आरोपी को भी उसके अपराध की सजा भुगतते हुए देखना चाहते हैं।
घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मजबूत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। फैसले के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में भी इसे न्यायपालिका के प्रति लोगों के विश्वास को मजबूत करने वाला निर्णय बताया जा रहा है।







