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‘इतने पेड़ लगाएं कि प्रकृति का कर्ज चुका सकें’—रविन्द्र जायसवाल का पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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"Plant enough trees to repay nature's debt"—Ravindra Jaiswal's message on environmental protection

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क तथा पंजीयन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने रविवार को आयोजित होने वाले वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कार्यक्रम के सफल, सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने काशीवासियों से अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि व्यक्ति के अंतिम संस्कार में बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पेड़ों की कटाई करनी पड़ती है। इससे प्रकृति पर भार बढ़ता है। उन्होंने कहा, “काशी के लोग आत्मसम्मानी हैं। क्यों न हम इतने पेड़ लगाएं कि मरने के बाद हमारे ऊपर प्रकृति का कोई कर्ज न रहे और उसकी भरपाई पहले ही कर जाएं।”


राज्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण महायज्ञ केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा जनआंदोलन है। उन्होंने अधिकारियों से निर्धारित दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने तथा अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में वृक्षारोपण स्थलों के चयन, गड्ढों की खुदाई, पौधों की उपलब्धता एवं गुणवत्ता, सुरक्षित परिवहन, सिंचाई व्यवस्था, पौधों के संरक्षण, जियो टैगिंग, विभागवार लक्ष्य, नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारियों तथा कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। श्री जायसवाल ने निर्देश दिए कि सभी स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्व से सुनिश्चित कर ली जाएं, ताकि वृक्षारोपण कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सके। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण के साथ पौधों का संरक्षण और नियमित देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक विभाग रोपे गए पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि पौधों के जीवित रहने की दर अधिकतम हो।

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श्री जायसवाल ने निर्देश दिए कि नगर के प्रत्येक वार्ड में एक उपयुक्त स्थल अथवा चौराहे का चयन कर वहां पर्याप्त संख्या में पौधे उपलब्ध कराए जाएं और वार्डवासियों को उनका निःशुल्क वितरण किया जाए, जिससे अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बनारस में पान के सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए पान और कत्था के पौधों के साथ-साथ शहतूत, अर्जुन, चिरौंजी तथा महुआ के पौधों के वितरण एवं रोपण पर भी बल दिया। इसके अलावा श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में उपयुक्त स्थानों पर बेल के पौधे लगाए जाने के निर्देश भी दिए।