
नयी दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Shashi Tharoor ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति और दोनों पक्षों के साथ अच्छे संबंध होने के बावजूद भारत इस संकट में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने से चूक गया है। थरूर ने विशेष रूप से इस बात पर असंतोष जताया कि जहां Pakistan, Turkey और Egypt जैसे देश मध्यस्थता की कोशिशों में सक्रिय हैं, वहीं भारत अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहा है।
थरूर ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में सरकार के संयमित रुख का समर्थन किया था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि भारत इस स्थिति का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा। लेकिन मौजूदा हालात उन उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। उन्होंने इसे “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि जब अन्य देश शांति वार्ता में पहल कर रहे हैं, तब भारत को कोई श्रेय नहीं मिल रहा है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के Iran और United States दोनों के साथ संतुलित संबंध हैं, जो उसे एक प्रभावी मध्यस्थ बना सकते थे। उनके अनुसार, नई दिल्ली के पास यह एक अनूठा अवसर था कि वह अपनी कूटनीतिक साख का इस्तेमाल कर सार्थक संवाद को आगे बढ़ाती।
यह बयान उस समय आया जब रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सरकार ने विपक्षी नेताओं को पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की रणनीति से अवगत कराया। बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों और विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जानकारी साझा की।
थरूर के इस बयान के बाद भारत की विदेश नीति और उसकी सक्रियता को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।






