पटना: साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादित बयान के मामले में बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की आज एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी होनी है। इससे पहले 15 मई को भी उन्हें कोर्ट में हाजिर होना था, लेकिन पुलिस की एक बड़ी लापरवाही के कारण उस दिन पेशी टल गई थी। गिरिराज सिंह के बचाव पक्ष के वकील अमरेंद्र कुमार अमर ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि नगर थाना पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में बड़ी लापरवाही बरती है। नियमानुसार, जांच के बाद कोर्ट में आरोप पत्र की मूल प्रति दाखिल करनी होती है, लेकिन पुलिस ने इसमें भारी गड़बड़ी कर दी।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने कोर्ट को मूल डायरी नहीं सौंपी। कोर्ट में दाखिल की गई 20 पन्नों की चार्जशीट में से सिर्फ 3 पन्ने ही मूल हैं, जबकि शेष 17 पन्ने फोटोकॉपी हैं। यही नहीं, मामले से जुड़ी जब्ती सूची भी गायब है। अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि इस लापरवाही को लेकर पहले भी एसपी और डीआईजी के माध्यम से नगर थाना पुलिस से जवाब-तलब किया जा चुका है। यह पूरा मामला साल 2019 के लोकसभा चुनाव का है। बेगूसराय के जीडी कॉलेज मैदान में एक चुनावी सभा आयोजित की गई थी, जिसमें मंच पर देश के गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे।
इसी मंच से गिरिराज सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार तनवीर हसन और सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की थी। अपने बयान में गिरिराज सिंह ने कहा था कि वे वंदे मातरम नहीं कह सकते, भारत की भूमि को नमन नहीं कर सकते। हमारे बाप-दादा तो सिमरिया में गंगा किनारे मरे, वहीं उनका दाह-संस्कार किया गया; लेकिन उस जमीन पर कोई कब्र नहीं बनाई गई। जबकि, ऊपर कुर्ता और नीचे पजामा पहनने वालों को तो मरने के बाद भी तीन हाथ जमीन की जरूरत होती है। इस भाषण के बाद राजनीतिक गलियारों में काफी हंगामा मचा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेगूसराय के तत्कालीन जिलाधिकारी राहुल कुमार के निर्देश पर नगर थाने में गिरिराज सिंह के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में आज कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।







