
सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने राज्य को तकनीकी और औद्योगिक हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026’ को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके तहत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई अहम प्रावधान किए गए हैं। नई नीति के अनुसार, राज्य में स्थापित होने वाली सेमीकंडक्टर यूनिट्स को मात्र 5 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि शेष लागत सरकार वहन करेगी। यह सुविधा यूनिट स्थापना के बाद 10 वर्षों तक दी जाएगी। इसके अलावा उद्योगों को 4 रुपए प्रति घन मीटर की दर से पानी भी उपलब्ध कराया जाएगा, जो दस साल तक लागू रहेगा। Samrat Choudhary ने Munger में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि बिहार को तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट फाइलिंग पर भी विशेष प्रोत्साहन की घोषणा की। इसके तहत देश में पेटेंट फाइल करने पर 10 लाख रुपए और विदेश में 20 लाख रुपए तक की सहायता दी जाएगी। वहीं उद्योगों को बैंक या वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण पर 7 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 25 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है। सरकार ने इस नीति के माध्यम से 25 हजार करोड़ रुपए के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने की योजना है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में 50 हजार सेमीकंडक्टर प्रोफेशनल्स तैयार करने का लक्ष्य भी तय किया गया है राज्य सरकार का उद्देश्य बिहार को सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब के रूप में विकसित करना है, जिससे राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में इस क्षेत्र की 5 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सके। कुल मिलाकर, यह नीति बिहार को तकनीकी और औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।






