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नवरात्रि 2026: दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में पूरी होती हर मन्नत, साधना के लिए उमड़ते श्रद्धालु

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Navratri 2026: Every wish is fulfilled at Dakshineshwari Kali Temple, with devotees flocking to perform spiritual practices.

सारण: बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और गौरवशाली धरती हरिहर क्षेत्र सोनपुर की पावन भूमि का धार्मिक और पौराणिक महत्व है। हरिहर क्षेत्र स्थित पवित्र गंगा और गंडक के संगम पर स्थित यह स्थल धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिणेश्वरी काली मंदिर प्राचीन काल से तंत्र-मंत्र की साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। मंदिर में 22 गज पर स्थापित शिवलिंग है, तो उसके ठीक उत्तर दिशा में काले पत्थर से बनी दक्षिणेश्वरी मां काली विराजमान हैं। दक्षिणेश्वरी काली मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र के अवसर पर गहरी आस्था और भक्ति का अद्भुत वातावरण बना हुआ है। सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, जहां भक्तजन मां काली के दर्शन और पूजन के लिए कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।

नवरात्र के पावन दिनों में प्रतिदिन पूरे विधि-विधान के साथ हवन, पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। विशेष रूप से सुबह और संध्या काल में होने वाले हवन, भजन-कीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर आराधना करते हुए मां काली से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। हवन की सुगंध, मंत्रोच्चार और भक्ति से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो जाता है। मां काली को शक्ति और रक्षा की देवी माना जाता है, लेकिन यहां की पूजा विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा से भी जुड़ी हुई मानी जाती है। साधना पूर्ण होने के बाद साधक मां काली की विशेष अर्चना करने के बाद पुनः अपने स्थान की ओर लौट जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, मां काली की भव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ बराबर लगी रहती है। इस मंदिर की विशेष मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। शायद यही कारण है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी साधक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। नवरात्र के नौ दिनों तक कई साधक मंदिर परिसर या उसके आसपास रहकर कठोर साधना करते हैं।

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उपवास, जप, ध्यान और विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों के माध्यम से सिद्धि प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से चाक-चौबंद है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल सहित कई अन्य प्रकार की आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं आसपास के क्षेत्रों में मेले जैसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां पूजा सामग्री, प्रसाद और अन्य धार्मिक वस्तुओं की दुकानें सजी हुई हैं। दक्षिणेश्वरी काली मंदिर परिसर नवरात्र के दौरान श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां हर आने वाला भक्त मां काली की कृपा प्राप्त कर खुद को धन्य महसूस कर रहा है। धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने गज-ग्राह युद्ध के दौरान गजराज की रक्षा के लिए अवतार लिया था। मंदिर के पश्चिम में गरुड़ पर सवार भगवान विष्णु की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है। मंदिर से कुछ ही दूरी पर बाबा हरिहरनाथ का मंदिर है। बाबा हरिहरनाथ मंदिर स्थित लोक सेवा आश्रम में संत मौनी बाबा रहते हैं। आश्रम में भगवान सूर्य और शनि देव का मंदिर भी है। इसी परिसर में विशाल हनुमान जी का मंदिर निर्माण हो रहा है।