Home एजुकेशन तीन दिवसीय चतुर्थ राष्ट्रीय देवमंगल मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न

तीन दिवसीय चतुर्थ राष्ट्रीय देवमंगल मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न

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तीन दिवसीय चतुर्थ राष्ट्रीय देवमंगल मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता संपन्न

डेहरी (रोहतास). नारायण स्कूल ऑफ लॉ, गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित चतुर्थ देव मंगल मेमोरियल राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 का समापन मंगलवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हो गया। 15 से 17 मार्च तक आयोजित इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विधि महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लेकर अपने विधिक कौशल, तर्कशक्ति एवं वकालत कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। समापन सत्र विश्वविद्यालय परिसर स्थित मूट कोर्ट हॉल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्मृति शेष देव नारायण सिंह एवं मंगला देवी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद नारायण स्कूल ऑफ लॉ, गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के डीन द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह एवं तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया, जो भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।

इस अवसर पर अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं विधि छात्रों को न्यायालयीन प्रक्रियाओं की वास्तविक समझ प्रदान करती हैं तथा उनके आत्मविश्वास एवं तर्क क्षमता का विकास करती हैं। इस अवसर पर डॉ उपेंद्र नाथ, सहायक प्रोफेसर, फैकल्टी ऑफ लॉ, दिल्ली विश्वविद्यालय माननीय अतिथि ने विधि छात्रों को उनके लक्ष्य के प्रति जागरूक किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. जगदीश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि विधि शिक्षा केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से छात्रों को सक्षम अधिवक्ता एवं न्यायविद् के रूप में तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. शैवाल सत्यार्थी प्रोफेसर, लॉ सेंटर-1, दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं छात्रों को न केवल कानूनी शोध एवं लेखन में दक्ष बनाती हैं, बल्कि उन्हें न्यायालयीन अनुशासन एवं पेशेवर नैतिकता का भी अनुभव कराती हैं। मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. प्रीति सक्सेना कुलपति, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, शिमला ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण प्रदान करती हैं, जिससे उनमें उत्कृष्टता की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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समापन सत्र का मुख्य आकर्षण प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा रही, जिसे मूट कोर्ट सोसाइटी के फैकल्टी संयोजक सत्य प्रकाश राय द्वारा प्रस्तुत किया गया। विजेता एवं उपविजेता टीमों को सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, मूट कोर्ट सोसाइटी के सदस्यों, कोर्ट मास्टर्स एवं स्वयंसेवकों को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मूट कोर्ट सोसाइटी के अध्यक्ष शुभम संदीप ने प्रतियोगिता की विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए आयोजन की रूपरेखा, प्रतिभागियों की संख्या एवं प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में फैकल्टी सह-संयोजक भव्या रानी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, निर्णायकों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन अत्यंत सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली ढंग से किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता ने न केवल छात्रों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान किया, बल्कि विधि शिक्षा के क्षेत्र में नारायण स्कूल ऑफ लॉ की सशक्त शैक्षणिक एवं व्यावहारिक प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।