नयी दिल्ली: राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते का भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सामरिक जरूरतों और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बहु-स्रोत रक्षा खरीद की नीति जारी रखेगा।
एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में रक्षा सचिव ने कहा कि भारत की रक्षा नीति पूरी तरह संतुलित और व्यावहारिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस भारत का एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार रहा है और भविष्य में भी परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार वहां से रक्षा उपकरणों की खरीद जारी रहेगी। इसके साथ ही भारत जरूरत पड़ने पर फ्रांस, अमेरिका और अन्य देशों से भी आधुनिक सैन्य तकनीक और उपकरण हासिल करेगा।
राजेश कुमार सिंह ने यह भी कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने, घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। उनका कहना था कि “हम स्वदेशीकरण पर दोगुना जोर देंगे, ताकि भविष्य में भारत अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने में सक्षम हो सके।”
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत दोनों देशों ने व्यापारिक शुल्कों को कम करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमानन, प्रौद्योगिकी और कोयले सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खरीद की योजना बनाई है, जबकि अमेरिका ने भारतीय कृषि उत्पादों को अपने बाजार में बेहतर पहुंच देने का आश्वासन दिया है।
रक्षा सचिव के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि भारत आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और रक्षा संतुलन बनाए रखने की नीति पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।







