Jan Suraj moves Supreme Court challenging Bihar elections

नयी दिल्ली। पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में ‘बड़े पैमाने पर अनियमितताओं’ का आरोप लगाते हुए चुनाव को चुनौती दी है और पुनः चुनाव करवाने का आग्रह करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गयी याचिका में बिहार सरकार पर आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना के अंतर्गत महिला मतदाताओं के बैंक खातों में 10,000 रुपए डाले गये और इस योजना में नये लाभार्थियों के नाम भी जोड़े गये थे।

याचिका के अनुसार, लाभार्थियों के नाम योजना में जोड़ना और चुनाव के दौरान निधि का बंटवारा गैर-कानूनी है और संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 2020 और 324 का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिये जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि मतदान के दोनों चरणों के दौरान जीविका समूह की 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को तैनात करना गैरकानूनी और भेदभावपूर्ण था।

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याचिकाकर्ता ने कथित भ्रष्टाचार के तहत दोबारा चुनाव करवाने की मांग उठाते हुए चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि सुब्रमणियम बालाजी बनाम तमिलनाडु मामले (2013) में उच्चतम न्यायालय की ओर से जारी निर्देश लागू किये जाएं और मुफ्त चीज़ों, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाएं (डीबीटी) और कल्याणकारी उपाय पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले सत्ताधारी राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त चीज़ें, डीबीटी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों जैसी योजनाओं को लागू करने के लिए कम से कम छह महीने की समय सीमा तय करे, जो निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर असर डाल सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ शुक्रवार को मामले पर सुनवाई करेगी।