पटना: बृहन् मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में इस बार बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र, खासकर मधुबनी और झंझारपुर के प्रवासी नेताओं ने शानदार प्रदर्शन कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। कांदिवली पूर्व के वार्ड नंबर 23 से भाजपा उम्मीदवार शिव कुमार झा की ऐतिहासिक जीत ने उन्हें मुंबई में उत्तर भारतीय और मैथिल समाज के प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। उन्होंने लगातार तीसरी बार जीत हासिल करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 5400 से अधिक मतों से पराजित किया, जो 2017 के मुकाबले लगभग दोगुना अंतर है।
अंधराठाढ़ी प्रखंड के गंगद्वार गांव के मूल निवासी शिव कुमार झा का राजनीतिक सफर प्रवासी समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। गांव से मुंबई तक के उनके सफर में सादगी, सामाजिक जुड़ाव और क्षेत्रीय मुद्दों पर सक्रियता ने उन्हें जनता के करीब रखा है। वे आज भी अपने पैतृक गांव से जुड़े रहते हैं और सामाजिक-धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं, जिससे प्रवासी समुदाय में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है।
बीएमसी चुनाव में झंझारपुर क्षेत्र के अन्य नेताओं ने भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की। मलाड के वार्ड 43 से बिनोद मिश्रा ने 3800 वोटों से जीत दर्ज की, जबकि गोरेगांव के वार्ड 163 से राजेश झा ने शिवसेना (शिंदे गुट) के टिकट पर 2200 मतों से बाजी मारी। कांदिवली के वार्ड 160 से संतोष कुमार मंडल 2500 वोटों से और वार्ड 161 से उमेश राय 1900 वोटों से विजयी रहे। कुर्ला-चांदीवली क्षेत्र के वार्ड 174 से धीरेंद्र मिश्रा ने 1100 वोटों से जीत हासिल की।
विश्लेषकों का मानना है कि कांदिवली, मलाड, गोरेगांव और कुर्ला जैसे इलाकों में उत्तर भारतीय मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन नेताओं की जीत यह दर्शाती है कि मुंबई के विकास और स्थानीय राजनीति में बिहार के प्रवासियों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। अलग-अलग समुदायों से भरे महानगर में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं, लेकिन मिथिलांचल के इन प्रतिनिधियों ने जनसेवा, संगठन और भरोसे के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।







