चेन्नई: तमिलनाडु के करूर में हुई दर्दनाक भगदड़ को लेकर सियासत तेज हो गई है। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के प्रमुख और अभिनेता से नेता बने विजय को जिम्मेदार ठहराया है। डीएमके प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने आरोप लगाया कि विजय के कार्यक्रम में देर से पहुंचने के कारण भीड़ बेकाबू हुई और 41 लोगों की जान चली गई।
एक मीडिया संस्थान से बातचीत में एलंगोवन ने कहा कि विजय ने लोगों को सुबह नौ बजे से शाम साढ़े सात बजे तक इंतजार करवाया, जबकि उन्हें दोपहर 12 बजे तक कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना था। भीषण गर्मी और अव्यवस्था के कारण लोग भूखे-प्यासे घंटों खड़े रहे, जिससे कई लोग बेहोश हुए और अंततः भगदड़ की स्थिति बन गई। उन्होंने कहा कि अगर विजय तय समय पर आ जाते तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी। डीएमके नेता ने यह भी आरोप लगाया कि विजय अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस बीच विजय मंगलवार को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में लंबी पूछताछ के बाद चेन्नई लौट आए। जांच एजेंसी ने उनसे सात घंटे से अधिक समय तक सवाल-जवाब किए। यह पूछताछ करूर भगदड़ मामले से जुड़ी थी। सीबीआई सूत्रों के अनुसार विजय को फिलहाल पोंगल त्योहार के मद्देनज़र राहत दी गई है, लेकिन उन्हें आगे भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
सीबीआई ने विजय को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 179 के तहत नोटिस जारी किया था। एजेंसी हादसे के समय, भीड़ प्रबंधन, आयोजकों की भूमिका और सुरक्षा इंतजामों को लेकर विस्तृत जांच कर रही है। पूछताछ के दौरान विजय के समर्थक बड़ी संख्या में सीबीआई कार्यालय के बाहर मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अक्टूबर में यह मामला तमिलनाडु पुलिस से सीबीआई को सौंपा गया था। राजनीतिक सभा के दौरान हुई इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। अब यह मामला राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप के साथ कानूनी जांच का केंद्र बन गया है, जिस पर पूरे तमिलनाडु की नजरें टिकी हैं।







