पटना: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए, महागठबंधन सहित कई दल और गठबंधन अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। इस बीच सबकी नजरें खगड़िया सदर सीट पर भी होंगी। खगड़िया की भौगोलिक संरचना की बात करें तो कई नदियों, गंगा, कोसी, गंडक, बागमती और कमला से प्रभावित है। इनके कारण यहां की जमीन एलुवियल (जलोढ़) और दलदली है। जिले का उत्तरी भाग अत्यधिक उपजाऊ है, जबकि दक्षिणी भाग में धान के खेत और वन क्षेत्र हैं। हालांकि, वार्षिक बाढ़ें यहां की कृषि व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी रहती हैं, जिससे फसलें नष्ट होती हैं और अर्थव्यवस्था प्रभावित होती हैं। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहां धान, गेहूं, मक्का और सब्जियां प्रमुख फसलें हैं। 2015 में स्थापित मेगा फूड पार्क ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। यह खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बड़ी पहल है, जो किसानों को मूल्य संवर्धन और रोजगार के अवसर प्रदान करती है। खगड़िया का चुनावी इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। 1951 से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं।
कांग्रेस ने पांच बार (1952, 1957, 1962, 1967, 1980), और जदयू ने तीन बार (2005, 2010, 2015) जीत हासिल की। संयुक्त समाजवादी पार्टी, निर्दलीय और भाजपा (1972 में भारतीय जनसंघ के रूप में) ने दो-दो बार, जबकि जनता पार्टी, सीपीआई और लोजपा ने एक-एक बार सफलता पाई। 2015 तक जदयू इस सीट पर लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुकी थी। लेकिन 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में लोजपा (LJP) के बागी रुख के कारण जेडीयू उम्मीदवार के वोट कट गए, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस उम्मीदवार को मिला और उसे जीत हासिल हुई। 2020 में कांग्रेस के छत्रपति यादव ने जेडीयू की पूनम कुमारी को सिर्फ तीन हजार वोटों से हराया था। इस हार में लोजपा की रेणु कुमारी की अहम भूमिका थी, जिन्होंने 20 हजार से ज्यादा वोट काटकर जेडीयू को नुकसान पहुंचाया था। इस बार के विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन और ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच सीधी टक्कर होने वाली है। हालांकि इस बार पिछली बार जैसे समीकरण नहीं है। चिराग पासवान इस बार एनडीए में हैं और उनकी पार्टी एनडीए के साथ ही चुनाव लड़ रही है। वहीं प्रशांत किशोर की पार्टी के चुनावी मैदान में आने से भी मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
खगड़िया सदर सीट पर एनडीए की ओर से जदयू प्रत्याशी बब्बू मंडल मैदान हैं तो वहीं महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. चंदन यादव चुनावी मैदान में है। वहीं जन सुराज से जयंती पटेल के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। खगड़िया के राजनीतिक रुझान का संकेत 2024 के लोकसभा चुनाव से मिलता है। इस चुनाव में एनडीए गठबंधन ने लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राजेश वर्मा को टिकट दिया था, जिन्होंने 50 फीसदी से ज्यादा वोट शेयर हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके मुकाबले, इंडिया गठबंधन ने यह सीट सीपीएम को दी थी, जिसे 38 फीसदी वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव के ये आंकड़े बताते हैं कि विधानसभा चुनाव भी काफी रोचक हो सकता है। खगड़िया सीट के जातीय समीकरण पर गौर करें तो यहां लगभग 13 फीसदी मतदाता मुस्लिम और 10 फीसदी मतदाता यादव हैं। हालांकि, प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ यह संकेत देती है कि इस बार मतदाता जातीय समीकरणों से इतर भी मतदान कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो खगड़िया के समीकरण रोचक बन सकते हैं और यहां कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।







