Swadeshi Jagran Manch takes a strong stance on US tariff threats, urging the government to stand firm and boycott American companies.

नयी दिल्ली: स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने अमेरिका की सीनेट द्वारा हाल ही में पारित उस कानून पर गहरा अफ़सोस जताया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क शुल्क लगाने का अधिकार देता है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं।


संगठन ने बुधवार को बयान में कहा कि उसका का दृढ़ विश्वास है कि किसी भी देश को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और संप्रभु व्यापार नीति तय करने का अधिकार नहीं है।
एसजेएम के राष्ट्रीय सहसंयोजक अश्विनी महाजन ने कहा,” हालांकि हम मानते हैं कि इस कानून को अभी पूरी विधायी प्रक्रिया से गुजरना बाकी है और शुल्क अपने आप लागू नहीं होंगे, फिर भी यह स्पष्ट रूप से मुक्त और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों और देशों के अपनी ऊर्जा नीतियां तय करने के संप्रभु अधिकार के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है।”

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एसजेएम का कहना है कि इस मुद्दे पर भारत सरकार के रुख का पूरी तरह से समर्थन करता है कि रूस से कच्चे तेल की भारत की खरीद ऊर्जा सुरक्षा, उपलब्धता, कीमत, आपूर्ति में विविधता और भारतीय उपभोक्ताओं के हितों पर आधारित है। भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वैध अंतरराष्ट्रीय बाजारों से ऊर्जा खरीदने के हमारे संप्रभु अधिकार को कोई तीसरा देश तय नहीं कर सकता।


संगठन ने कहा है कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका में आने वाले सामान पर अनुचित शुल्क लगाने की धमकी दी गई है। ऐसी धमकियां अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही मिलती रही हैं; वास्तव में, अमेरिका में आने वाले भारतीय सामानों पर कभी-कभी भारी शुल्क लगाए गए हैं, जिससे हमारे निर्यात पर काफी असर पड़ा है। इन शुल्कों को अलग-अलग नामों से जाना गया है—जैसे रेसिप्रोकल टैरिफ (पारस्परिक शुल्क) और राष्ट्रीय सुरक्षा शुल्क से लेकर सेक्शन 301 शुल्क, सेक्शन 232 शुल्क, दंडात्मक शुल्क (रूसी तेल खरीदने के लिए), व्यापार घाटा शुल्क और जबरन श्रम शुल्क—और यह सूची कभी खत्म नहीं होती।