Supreme Court granted interim bail to Abbas Ansari

उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के गैंगस्टर कानून के तहत दर्ज मामले में अंतरिम जमानत प्रदान कर दी है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस जमानत के साथ कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अंसारी को लखनऊ स्थित सरकारी आवास में ही रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, मऊ निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करने से पहले अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अदालत ने यह भी कहा कि अंसारी बिना पूर्व अनुमति उत्तर प्रदेश से बाहर नहीं जा सकते और किसी भी न्यायिक सुनवाई में पेश होने से पहले पुलिस अधिकारियों को सूचित करना होगा। शीर्ष अदालत ने अंसारी की जमानत पर पुलिस से छह सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अब्बास अंसारी के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम, 1986 की धाराओं के तहत मामला दर्ज है। 31 अगस्त 2024 को चित्रकूट जिले के कोतवाली कर्वी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में अंसारी के अलावा नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान के नाम भी शामिल हैं। आरोपों में जबरन वसूली और मारपीट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। हाईकोर्ट ने 18 दिसंबर 2024 को अंसारी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। मामले की जांच अभी जारी है और इसी सिलसिले में उन्हें 6 सितंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था अब्बास अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक हैं। वे प्रसिद्ध नेता मुख्तार अंसारी के बेटे हैं।

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