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‘सौ में साठ हमारा, बाकी में बंटवारा’—केशव प्रसाद मौर्य ने दिया नया नारा

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'Sixty out of hundred is ours, the rest will be divided'—Keshav Prasad Maurya gave a new slogan

पटना: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अब यह आरोप लगने लगे हैं कि यह केवल वैश्य और सवर्णों की पार्टी नहीं रही, बल्कि अब पिछड़े और अतिपिछड़ों को भी मुख्य धुरी बना चुकी है। यह अलग बात है कि इशारों इशारों में आज यह बात उत्तर प्रदेश के एक बड़े भाजपा नेता ने कह दी। भाजपा नेता ने कहा कि ‘सौ में साठ हमारा, बाकी में बंटवारा।’ बिहार चुनाव से पहले भाजपा नेता का ये बयान काफी अहम माना जा रहा है। आइए जानते हैं यूपी के बड़े भाजपा नेता का इशारा क्या था और किसके लिए था! उत्तर प्रदेश के ये बड़े भाजपा नेता हैं यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य

बिहार चुनाव के लिए केशव प्रसाद मौर्य ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दे दिया है। हालांकि जिक्र वे उपराष्ट्रपति चुनाव के परिणाम को लेकर कर रहे थे, पर इस जिक्र के साथ साथ उन्होंने ‘इंडिया’ अलायंस पर नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते सोशल मीडिया साइट एक्स पर यह लिखा- ‘अब बारी बिहार की है। वहां विधानसभा चुनाव में एनडीए का नारा होगा- ‘सौ में साठ हमारा, बाकी में बंटवारा’, जनता को नरेंद्र मोदी की डबल इंजन की सरकार इसलिए भाती है, क्योंकि वह सबके जीवन में ‘रोशनी’ लाती है।’ केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी लिखा- ‘इंडिया गठबंधन को धता बताकर एनडीए गठबंधन ने उपराष्ट्रपति का चुनाव 60 फीसदी से अधिक मतों से जीता है।

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दुर्भाग्य है कि इंडिया गठबंधन ने इस चुनाव में उस नक्सलवाद को अपना मोहरा बनाया था, जिसे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने लगभग ठिकाने लगा दिया है।’ अब इसे संयोग कहें कि समाजवादी चिंतक और स्वीकार्य नेता राम मनोहर लोहिया ने भी पिछड़ी वंचितों की आवाज बनते कहा था- ‘संसोपा ने बांधी गांठ, पिछड़ा पावे सौ में साठ’, यह वही नारा है, जिसके सहारे जब नायक कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद, शरद यादव, नीतीश कुमार ने अपनी अपनी राजनीति की फसल काटी। सत्ता की लड़ाई में भाजपा ने भी अपनी नीतियां बदली और सॉफ्ट समाजवादी नेताओं के साथ नई राजनीति की और कदम बढ़ाया। इस राजनीति के तहत पूर्व प्रधानमंत्री अटक बिहारी वाजपेयी ने समाजवादी नेता नीतीश कुमार पर भरोसा किया।

और तब लालू प्रसाद की सत्ता को न केवल चुनौती दी, बल्कि सत्ता की बागडोर भी थामी। बदलती सामाजिक स्थिति में सत्ता का समीकरण पिछड़ा अतिपिछड़ा के हाथ जा लगा। बीजेपी ने भी पिछड़ा की ताकत को समझा और उनके बीच पैठ बनानी शुरू की। यही वजह है कि पिछले कई वर्षों से भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष पिछड़ा से ही बनाया जा रहा है। मंगल पांडेय के बाद प्रदेश अध्यक्ष बनने वालों में नित्यानंद राय, डॉ संजय जायसवाल, सम्राट चौधरी और अब डॉ. दिलीप जायसवाल के हाथों बागडोर दे कर अपनी मंशा प्रगट कर दी। आज इस राजनीत के सपोर्ट में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नारा बिहार विधान चुनाव 2025 के लिए स्पष्ट संकेत है। अब जनता इन संकेतों को कितना समझती है, देखना शेष है।

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