Home बिहार 10 साल में जर्जर हुआ करोड़ों का पुल, खतरे में सफर

10 साल में जर्जर हुआ करोड़ों का पुल, खतरे में सफर

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Multi-crore bridge dilapidated within 10 years; travel becomes hazardous.

नालंदा: निर्माण में कथित लापरवाही का खामियाजा नालंदा और शेखपुरा जिले की बड़ी आबादी भुगत रही है। बिहारशरीफ-कतरीसराय मार्ग पर दरियापुर के पास सकरी नदी पर बना पुल जर्जर हो चुका है। पिलर धंसने के बाद प्रशासन ने करीब दो माह पहले पुल के दोनों छोर पर ईंट की दीवार खड़ी कर वाहनों की आवाजाही रोक दी थी। हालांकि, वैकल्पिक मार्ग के रूप में बनाया जा रहा डायवर्जन अब तक अधूरा है। बारिश के बाद कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो गया है, जिससे हर दिन सैकड़ों दोपहिया वाहन चालक जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं।

नदी के तल में ह्यूम पाइप डालकर रास्ता तो बनाया गया है, लेकिन मुख्य सड़क से जोड़ने वाले दोनों एप्रोच पथ अब भी कच्चे हैं। लगातार बारिश के कारण इन रास्तों पर कीचड़ जमा हो गया है, जिससे बाइक और साइकिल सवार फिसलकर गिर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सकरी नदी का जलस्तर बढ़ा, तो यह कच्चा डायवर्जन बह सकता है और आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाएगी। पुल बंद होने से मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ समेत कई गांवों का बिहारशरीफ से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जिला मुख्यालय की दूरी 12 से 15 किलोमीटर थी, लेकिन अब गिरियक-पावापुरी होकर 35 से 40 किलोमीटर या अस्थावां होकर 22 से 25 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।

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इससे समय, ईंधन और खर्च तीनों बढ़ गए हैं। डायवर्जन की खराब स्थिति के कारण लोगों ने प्रशासन द्वारा बनाई गई ईंट की दीवार का एक हिस्सा तोड़ दिया है। इसके बाद कई बाइक सवार और अन्य लोग क्षतिग्रस्त पुल से ही आवाजाही कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते रोकथाम नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सकरी नदी पर बना यह पुल महज 10 साल में ही जर्जर हो गया। उनका कहना है कि पुल के पिलरों के आसपास कथित अवैध बालू खनन से नींव कमजोर हुई। इसके बाद दो साल पहले आई बाढ़ से स्थिति और बिगड़ गई। समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण पिलर धंस गए और पुल उपयोग के लायक नहीं बचा।