Home बिहार सिलाई मशीन चलाने वाले पिता के संघर्ष ने बेटे को बनाया डॉक्टर

सिलाई मशीन चलाने वाले पिता के संघर्ष ने बेटे को बनाया डॉक्टर

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The struggle of a sewing machine operator made his son a doctor.

कैमूर: जिले के मोहनिया प्रखंड क्षेत्र के बेलौड़ी गांव निवासी अब्दुल कलाम ने NEET परीक्षा पास कर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने आर्थिक परेशानियां भी बाधा नहीं बन सकतीं। अब्दुल कलाम की इस कामयाबी के पीछे उनके पिता का संघर्ष भी प्रेरणादायक है।

परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उनके पिता सिलाई मशीन चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने तमाम मुश्किलों के बीच अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। तीन भाइयों में सबसे बड़े अब्दुल कलाम ने पढ़ाई के दौरान आने वाली तमाम चुनौतियों का डटकर सामना किया। अपनी मेहनत से उन्होंने NEET परीक्षा में सफलता हासिल की और अपने दोनों छोटे भाइयों के लिए भी प्रेरणा बने।

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जैसे ही अब्दुल कलाम के NEET परीक्षा पास करने की खबर गांव में पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर खुशी मनाई और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अब्दुल कलाम और उनके परिवार को बधाई दी। वहीं, बेटे की इस सफलता से पिता के चेहरे पर भी खुशी साफ नजर आई। वर्षों से सिलाई मशीन चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले पिता के संघर्ष और बेटे की कड़ी मेहनत का आखिरकार सुखद परिणाम सामने आया है। अब्दुल कलाम की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर मेहनत करने का जुनून, लक्ष्य के प्रति समर्पण और परिवार का साथ हो, तो आर्थिक चुनौतियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।